पुस्तकालयों का योगदान-पुस्तकालय सच्चे अर्थों में माता सरस्वती के पूजा-गृह हैं। अतः ज्ञान प्राप्ति में अधिकांश योगदान देने के लिए पुस्तकालयों की व्यवस्था की जाती है। इन स्थानों में विभिन्न विषयों एवं विभिन्न देशों से सम्बन्धित बातों की पुस्तकें सहज ही सुलभ हो सकती हैं।
लाभ-मूल्यवान तथा अधिक पुस्तकें पढ़ने की सुविधाएँ पुस्तकालयों में ही सुलभ हो सकती हैं। पुस्तकालय हमारे भीतर पढ़ने की रुचि उत्पन्न करते हैं। जब हम वहाँ पर जाकर विभिन्न विद्वानों द्वारा लिखित पुस्तकें देखते हैं तो पढ़ने की स्वतः ही इच्छा होने लगती है। उपयोगिता-विद्यालयों में शिक्षण सुविधा के लिए अच्छे पुस्तकालय की व्यवस्था होना परम आवश्यक है।
वास्तविक रूप में पुस्तकालय ही विद्यालयों की समस्त क्रियाओं के केन्द्र होते हैं। बहुत अच्छा हो यदि विद्यालयों में केन्द्रीय पुस्तकालयों के अतिरिक्त कक्षा पुस्तकालयों का भी प्रबन्ध किया जाए तो ये अधिक उपयोगी हो सकते हैं।
उपसंहार-वर्तमान काल में हमारे देश में पुस्तकालयों की दशा अत्यन्त ही चिंतनीय है। न तो उनके पास अच्छे सुविधाजनक भवन ही हैं और न पुस्तकें। पर जहाँ पर अच्छे पुस्तकालय हैं, वहाँ पर निःसंदेह माँ सरस्वती की सुचारु रूप से प्रार्थना हो रही है। .