मनाने का समय और कारण-रक्षाबन्धन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। रक्षाबन्धन त्योहार को मनाने के पीछे अनेक दन्तकथाएँ प्रचलित हैं। राजस्थान में यह त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। बहिनें नवीन वस्त्र तथा आभूषण धारण कर अपने भाई के ललाट पर मंगल का टीका लगाती हैं,
मिठाई खिलाती हैं तथा हाथ में राखी बांधती हैं। यह त्योहार भाई-बहिन के पवित्र सम्बन्धों का त्योहार है। रक्षाबन्धन का महत्त्व-रक्षाबन्धन एक सांस्कृतिक त्योहार ही नहीं है, अपितु सामाजिक महत्त्व का त्योहार भी है। यह भाईचारा बढ़ाने वाला त्योहार है। कहा जाता है कि रानी कर्णवती ने अपनी रक्षा के लिए मुसलमान बादशाह हुमायूँ को अपना 'राखी-बन्ध' भाई बनाया था, जिसने मुसीबत के समय रानी की सहायता की थी। उपसंहार-इस प्रकार रक्षाबन्धन त्योहार प्रेम-भाव बढ़ाता है। इस दिन भाई व बहिन परस्पर स्नेह-बन्धन की परम्परा को स्वीकार करते हैं तथा अपना कर्तव्य पालन करने की प्रतिज्ञा करते हैं।
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