विशिष्ट त्योहार-होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। उसी रात को अथवा दूसरे दिन अत्यन्त शीघ्र प्रातःकाल प्रत्येक गाँव तथा नगर में स्थान-स्थान पर होलिका जलाई जाती है। इसकी आग से प्रत्येक सनातनधर्मी (हिन्दू) के घर में छोटी-छोटी होलियाँ प्रज्वलित की जाती हैं। मनाने का तरीका-इस अवसर पर नये पके हुए अन्न को होली की आग में भूनते हैं और इस भुने हुए अन्न अर्थात् आखतों को आपस में वितरित करते हैं। कुछ लोग इस त्योहार का सम्बन्ध प्रह्लाद की बुआ 'होलिका' से स्थापित करते हैं।
होली खेलना-होलिका-दहन के उपरान्त लोग रंग और गुलाल से होली खेलते हैं। अपरान्ह में स्नान, भोजन इत्यादि करने के पश्चात् सभी लोग साफ अथवा नवीन वस्त्र धारण करके एक-दूसरे के यहाँ जाते हैं और एकदूसरे से मिलते हैं। इस अवसर पर शत्रु भी मित्र के समान परस्पर मिलते हैं।
उपसंहार-ब्रज में आठ दिनों तक रंग की होली होती है और होली नामक गीत बड़े प्रेम के साथ गाया जाता है। ब्रज की होली प्रसिद्ध है; परन्तु किसी-किसी प्रदेश में पंचमी के दिन होली खेली जाती है।
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