भारत एक अत्यंत प्राचीन देश है जो कभी ‘सोने की चिड़िया’ कहलाता था। यह देश ऋषि-मुनियों साधु-संतों, महापुरुषों आदि का देश है। स्वयं भगवान ने भी इसी देश में अवतार लिया। यह देश देवताओं का भी दुलारा है। राजा दुष्यंत के पुत्र के नाम पर इसका नाम ‘भारत’ पड़ा। यह एक विशाल देश है। जनसंख्या के आधार पर यह संसार में दूसरे नंबर पर है। यह हमारी प्रिय मातृ भूमि है। भारत की प्राकृतिक बनावट एवं इसकी संपदा अद्भुत है। भारत के उत्तर में हिमालय है और शेष तीन ओर समुद्र हैं। यहाँ पर अनेक पर्वत, नदियाँ, मैदान और मरुस्थल हैं।
भारत का क्षेत्रफल बहुत विशाल है। यह एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ की लगभग 80 प्रतिशत जनता गाँवों में रहती है। यहाँ गेहूँ, मक्का, ज्वार, धान, गन्ना आदि की फ़सलें होती हैं। यहाँ की धरती बहुत उपजाऊ है। यहाँ के हरे-भरे वन इसकी शोभा बढ़ाते हैं। यहाँ गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियाँ बहती हैं।
यहाँ ताजमहल, लालकिला, कुतुब मीनार, स्वर्ण मंदिर, अजंता तथा एलोरा की गुफाएँ देखने योग्य हैं। यहाँ सारनाथ, शिमला, मंसूरी, श्रीनगर, नैनीताल, भ्रमण योग्य स्थान हैं। यहाँ श्रीराम, श्रीकृष्ण, गुरुनानक, बुद्ध, विवेकानंद, दयानंद, रामतीर्थ जैसे महापुरुष पैदा हुए हैं। भारत की भूमि में सोना, चांदी, तांबा, लोहा, कोयला आदि अनेक प्रकार के खनिज मिलते हैं।
यहाँ भिन्न-भिन्न धर्मों के लोग रहते हैं। सभी लोग बड़े प्रेम से रहते हैं। सब अपने-अपने ढंग से ईश्वर की आराधना करते हैं। यहाँ पर अनेक तीर्थ-स्थल हैं। हमारा देश दिन दुगुनी रात चौगुनी उन्नति करे। हम ईश्वर से यही प्रार्थना करते हैं। इसके अलावे प्रत्येक भारतवासी का भी कर्तव्य है कि वह देश की अखंडता और एकता के लिए कार्य करे तथा इसके सम्मान की रक्षा के लिए संकल्प ले।