Question
विद्यालय का वार्षिक उत्सव

Answer

प्रस्तावना-श्रेष्ठ विद्यालयों में पाठ्यक्रम के साथ-साथ पाठ्य सहगामी प्रवृत्तियों को भी महत्त्व दिया जाता है। विद्यालयों में होने वाले उत्सव भी इसी प्रकार पाठ्य सहगामी प्रवृत्तियों में से एक हैं। उनमें भाग लेकर छात्रों को उसके आयोजन करने, संगठन करने तथा उसको पूरा करने आदि का अनुभव होता है।

खेल-कूद का आयोजन-हमारे विद्यालय में प्रतिवर्ष पन्द्रह दिसम्बर को वार्षिकोत्सव मनाया जाता है। वार्षिकोत्सव के पहले खेलकूद होते हैं। विद्यालय के ज्येष्ठ और कनिष्ठ छात्रों को अलग-अलग वर्गों में विभाजित कर दिया जाता है। इसमें अनेक प्रकार के खेल होते हैं। उत्सव का आयोजन-इस बार भी पन्द्रह दिसम्बर को दोपहर में विद्यालय का वार्षिक उत्सव सरस्वती वन्दना से प्रारम्भ हुआ। इसके पश्चात् स्वागत गान हुआ, मुख्य अतिथि को माला पहनाकर प्रधानाचार्यजी ने अभिनन्दन किया।

छात्रों ने मनोहर गीत गाये, हृदय को आकर्षित करने वाले हिन्दी तथा अंग्रेजी के अनेक प्रहसन हुए। छात्रों के कार्यक्रम के पश्चात् प्रधानाचार्यजी ने विद्यालय का प्रगति विवरण प्रस्तुत किया। इसके पश्चात् माननीय अतिथि महोदय शिक्षा मन्त्री का अत्यन्त ही ओजस्वी और सारगर्भित भाषण हुआ। उन्होंने देश और विदेशों से प्राप्त अपने अनुभव बतलाये और छात्रों को कर्तव्य-पालन करने की प्रेरणा दी। भाषण के पश्चात् उन्होंने क्रीड़ाओं, वाद-विवाद प्रतियोगिताओं, बालमेले के श्रेष्ठ दुकानदारों तथा कक्षाओं में प्रथम और द्वितीय आने वाले छात्रों को पुरस्कार वितरित किये।

उपसंहार-इसी समय कुछ व्यक्तियों ने छात्रों के मिष्टान्न के लिये भी धनराशि प्रदान की। अन्त में, राष्ट्रीय गान के पश्चात् उत्सव समाप्त हो गया। उत्सव की प्रसन्नता में एक दिन का अवकाश घोषित किया गया।

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