(1) प्रदूषित मृदा के भौतिक, रासायनिक तथा जैविक गुणों में ह्रास होने से बीजों का अंकुरण एवं पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है।
(2) मृदा में वायु संचार में व्यवधान उत्पन्न होने से पौधों की जड़ों तथा जीवाणुओं के श्वसन में व्यवधान उत्पन्न होता है जिससे पौधों की वृद्धि ठीक प्रकार से नहीं हो पाती है।
(3) मृदा क्षरण के कारण पोषक तत्व बह जाते हैं, विभिन्न रसायनों के अधिक प्रयोग से मृदा pH मान परिवर्तित हो जाता है, परिणामस्वरूप पौधों के लिए पोषक तत्वों की उपलब्धता कम हो जाती है।
(4) मृदा में विषैले पदार्थों के अधिक संग्रहित हो जाने से इनका पौधों में भोजन के साथ समावेश होने से फसलों में विषैला प्रभाव दिखाई देने लगता है।
(5) अतः पौधों के लिए पोषक तत्व तथा जल की असामान्य उपलब्धता फसलोत्पादन को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं तथा फसलों एवं फलों की गुणवत्ता में भी कमी आती है।