नियोजन व संगठन
(i) नियोजन- पहले से ही निर्णय करना कि क्या करना है, क्यों करना है, कहाँ करना है, कब करना है, कैसे करना है तथा किस व्यक्ति द्वारा करना है? इन सभी बातों पर ध्यान देते हुए प्रबन्धक को उक्त कार्य के लिए कार्यक्रम तैयार करना होता है तथा उद्देश्य एवं नीतियाँ भी निर्धारित करनी होती हैं।
(ii) संगठन- नियोजन द्वारा उद्देश्य एवं लक्ष्य निर्धारित कर लेने के पश्चात् उन्हें कार्यान्वित करने की समस्या आती है जिसे प्रबन्ध 'संगठन' के माध्यम से करता है। संगठन का आशय योजना द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति करने वाले तन्त्र से है। उपक्रम की योजनाएँ चाहे कितनी भी अच्छी एवं आकर्षक क्यों न हों, यदि उनको कार्यान्वित करने के लिए अच्छे संगठन का अभाव है तो सफलता की कामना करना निष्फल ही होगा।