मेले का दृश्य-तीज के मेले में सभी नर-नारी, बालकवृद्ध अपनी आकर्षक वेशभूषा पहनकर इसमें सम्मिलित होते हैं। गाँव के लोग स्थान-स्थान पर झुण्ड बनाकर लोक-गीत गाते हैं। त्रिपोलिया एवं गणगौरी बाजार की छतें तथा बरामदे लोगों से भर जाते हैं। संध्या को तीज माता की सवारी पूरे लवाजमे के साथ निकलती है।
पुलिस तथा स्थानीय बैण्ड सवारी के आगे-आगे चलते हैं। तीज माता की सवारी पालकी में निकलती है। यह जुलूस छोटी चौपड़ का चक्कर लगाकर गणगौरी दरवाजे से चौगान के रास्ते तालकटोरे तक जाता है। चौगान में मेला भरता है। वहाँ पर युवतियाँ झूले झूलती हैं। वहाँ पर कई तरह के तमाशे दिखाये जाते हैं। दुसर दिन भी इसी प्रकार का मेला भरता है।
उपसंहार-तीज के मेले से लोगों का काफी मनोरंजन होता है। इस प्रकार मेले सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं।
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