Question
समाज में व्याप्त लड़का-लड़की के भेदभाव को लेकर संवाद

Answer

  • सुनीता : क्या कर रही हो सरला?
  • सरला : कुछ नहीं, आज तो छुट्टी है, यूँ ही बैठी हूँ।
  • सुनीता : यूँ ही नहीं, तुम कुछ सोच रही हो!
  • सरला : क्या बताऊँ! घर में भाभी के लड़की पैदा हुई है। लगता है संसार में लड़की होना एक अभिशाप है।
  • सुनीता : सच कहती हो। चाहे सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के नारे लगाती रहे, परन्तु समाज में लड़की को नहीं, लड़के को ही महत्त्व दिया जाता है।
  • सरला : इसी कारण आजकल माँ के गर्भ में ही लड़की को समाप्त कर दिया जाता है।
  • सुनीता : अल्ट्रासाउण्ड मशीन से चुपचाप लिंग-परीक्षण कर लोग कानून का खुलेआम उल्लंघन करते
  • सरला : समाज में व्याप्त लड़का-लड़की का भेदभाव कब समाप्त होगा?
  • सुनीता : यह तो अब हमें ही सोचना होगा! आखिर लड़कियाँ कब तक सहती रहेंगी।

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