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Question 13 Marks
राष्ट्रीय ताप विद्युत गृह किस प्रकार पर्यावरण तथा संसाधन संरक्षण का ध्यान रखता है?
Answer
राष्ट्रीय ताप विद्युत गृह (NTPC) भारत में राष्ट्रीय ताप विद्युत गृह कारपोरेशन विद्युत प्रदान करने वाला मुख्य निगम है। इसके पास पर्यावरण प्रबंधन तंत्र (EMS) 14001 के लिए आईएसओ (ISO) प्रमाण पत्र है। यह निगम प्राकृतिक पर्यावरण और संसाधन के संरक्षण का पूरा ध्यान रखता है तथा इन्हें ध्यान में रखकर ही विद्युत संयंत्रों की स्थापना करता है। पर्यावरण एवं संसाधन संरक्षण के लिए यह निम्न उपाय करता है-
आधुनिकतम तकनीकों पर आधारित उपकरणों का सही उपयोग करके तथा विद्यमान उपकरणों में सुधार करना। अधिकतम राख का इस्तेमाल कर अपशिष्ट पदार्थों का न्यून उत्पादन रखना।
पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए हरित क्षेत्र की सुरक्षा तथा वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करना।
तरल अपशिष्ट प्रबंधन, राख युक्त जलीय पुनर्चक्रण तथा राख-संग्रह (Ash pond) प्रबंधन द्वारा पर्यावरण प्रदूषण को कम करना।
पारिस्थितिकीय दृष्टि से सभी ऊर्जा संयंत्रों की मॉनिटरिंग तथा समीक्षा करना एवं आँकड़ों का ऑनलाइन प्रबन्धन करना।
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Question 23 Marks
राष्ट्रीय ताप विद्युत गृह (NTPC) पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer
राष्ट्रीय ताप विद्युत गृह (NTPC) भारत में राष्ट्रीय ताप विद्युत गृह कारपोरेशन विद्युत प्रदान करने वाला मुख्य निगम है। इसके पास पर्यावरण प्रबंधन तंत्र (EMS) 14001 के लिए आईएसओ (ISO) प्रमाण पत्र है। यह निगम प्राकृतिक पर्यावरण और संसाधन के संरक्षण का पूरा ध्यान रखता है तथा इन्हें ध्यान में रखकर ही विद्युत संयंत्रों की स्थापना करता है। पर्यावरण एवं संसाधन संरक्षण के लिए यह निम्न उपाय करता है-
आधुनिकतम तकनीकों पर आधारित उपकरणों का सही उपयोग करके तथा विद्यमान उपकरणों में सुधार करना। अधिकतम राख का इस्तेमाल कर अपशिष्ट पदार्थों का न्यून उत्पादन रखना।
पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए हरित क्षेत्र की सुरक्षा तथा वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करना।
तरल अपशिष्ट प्रबंधन, राख युक्त जलीय पुनर्चक्रण तथा राख-संग्रह (Ash pond) प्रबंधन द्वारा पर्यावरण प्रदूषण को कम करना।
पारिस्थितिकीय दृष्टि से सभी ऊर्जा संयंत्रों की मॉनिटरिंग तथा समीक्षा करना एवं आँकड़ों का ऑनलाइन प्रबन्धन करना।
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Question 33 Marks
सूचना प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक उद्योग के बारे में बताइये।
Answer
सूचना प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक उद्योग-पूरे विश्व में वर्तमान में इस उद्योग का महत्व बढ़ता जा रहा है। भारत में भी सूचना प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक उद्योग का बहुत विकास हुआ है। इस उद्योग का वर्णन निम्न बिंदुओं में स्पष्ट है-
भारत में इलैक्ट्रोनिक उद्योग के अंतर्गत ट्रांजिस्टर से लेकर टेलीविजन, टेलीफोन, सेल्यूलर टेलीकॉम, टेलीफोन एक्सचेंज, राडार, कम्प्यूटर तथा दूरसंचार उद्योग के लिए उपयोगी अनेक अन्य उपकरण तक बनाये जाते हैं।
बेंगलूरु भारत की इलेक्ट्रॉनिक राजधानी के रूप में उभरा है।
भारत में इलेक्ट्रोनिक सामान के अन्य महत्वपूर्ण उत्पादक केंद्र मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई, कोलकाता तथा लखनऊ हैं। बेंगलुरु, नोएडा, मुम्बई, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे में इस उद्योग का सर्वाधिक संकेंद्रण हुआ है।
भारत में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के सफल होने का कारण हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर का निरंतर विकास है।
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Question 43 Marks
सीमेंट उद्योग पर एक लेख लिखिए।
Answer
सीमेंट उद्योग-सीमेंट उद्योग एक आधारभूत उद्योग है। घर, कारखाने, पुल, सड़कें, हवाई अड्डा, बाँध तथा अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों के निर्माण में सीमेंट आवश्यक पदार्थ है। इस उद्योग हेतु कच्चा माल चूना पत्थर, सिलिका, एल्यूमिना एवं जिप्सम होता है। रेल परिवहन के अतिरिक्त इसमें कोयला तथा विद्युत ऊर्जा भी आवश्यक है।
विकास-भारत में पहला सीमेंट कारखाना सन् 1904 में चेन्नई में लगाया गया था। स्वतंत्रता के पश्चात् इस उद्योग का प्रसार हुआ। सन् 1989 से मूल्य व वितरण में नियंत्रण समाप्ति तथा अन्य नीतिगत सुधारों से सीमेंट उद्योग ने क्षमता, प्रक्रिया व प्रौद्योगिकी व उत्पादन में अत्यधिक तरक्की की है। अब देश में अनेक बड़े तथा छोटे सीमेंट संयंत्र हैं जिनमें विविध प्रकार के सीमेंटों का उत्पादन किया जाता है।
सीमेंट की घरेलू बाजार में बहुत माँग है साथ ही पूर्वी एशिया, मध्यपूर्व, अफ्रीका तथा दक्षिण एशिया के बाजारों में भी बहुत माँग है।
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Question 53 Marks
चीनी उद्योग में दक्षिण एवं पश्चिमी राज्यों की ओर स्थानान्तरण होने की प्रवृत्ति के कारणों को बताइए।
Answer
दक्षिणी व पश्चिमी राज्यों में गन्ने में सुक्रोस की अधिक मात्रा का होना।
अपेक्षाकृत ठण्डी जलवायु का होना भी गुणकारी है।
यहाँ स्थित चीनी मिलें सहकारिता क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं। यहाँ गन्ने की खेती एवं चीनी मिलों को सहकारिता तंत्र के अन्तर्गत एकीकृत किया गया है।
उत्तर भारत की तुलना में यहाँ गन्ने की प्रति हैक्टेयर उपज का अधिक होना। उत्तर भारत की तुलना में यहाँ सिंचाई सुविधाओं की पर्याप्तता होना।
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Question 63 Marks
इस्पात निर्माण प्रक्रिया का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer
इस्पात निर्माण की प्रक्रिया निम्न प्रकार है-
कच्चा माल (लौह-अयस्क) को लोहा एवं इस्पात संयंत्रों तक लाया जाता है। लौह-अयस्क को भट्टी में डालकर गलाया जाता है, फिर इसमें चूना पत्थर मिलाया जाता है तथा धातु के मैल को हटाया जाता है।
पिघले हुए लोहे को साँचों में डालकर ढलवाँ लोहा तैयार किया जाता है।
ढलवां लोहे को पुनः गलाकर ऑक्सीजन द्वारा उसकी अशुद्धि को हटाकर तथा मैंगनीज, निकल, क्रोमियम मिलाकर शुद्ध किया जाता है। रोलिंग, प्रेसिंग, ढलाई एवं गढ़ाई के द्वारा धातु को आकार दिया जाता है।
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Question 73 Marks
भारतीय अर्थव्यवस्था में वस्त्र उद्योग का महत्त्व स्पष्ट कीजिए।
Answer
भारतीय अर्थव्यवस्था में वस्त्र उद्योग का महत्त्व-वस्त्र उद्योग एक कृषि आधारित उद्योग है। इसे अपने उत्पादों के निर्माण के लिए कृषि से प्राप्त कच्चे माल पर निर्भर रहना पड़ता है। भारतीय अर्थव्यवस्था में वस्त्र उद्योग का महत्त्व निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट है-
वस्त्र उद्योग का औद्योगिक उत्पादन में महत्त्वपूर्ण योगदान है।
यह उद्योग लगभग लाखों व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध करवाता है। यह रोजगार उपलब्ध कराने की दृष्टि से कृषि के पश्चात् दूसरा बड़ा उद्योग है।
वस्त्र उद्योग कृषकों, कपास चुनने वालों, गाँठ बनाने वालों, कताई करने वालों, रंगाई करने वालों, डिजाइन बनाने वालों, पैकेट बनाने वालों और सिलाई करने वालों को जीविका प्रदान करता है।
वस्त्र उद्योग के कारण रसायन रंजक मिल स्टोर तथा पैकेजिंग स्गमग्री और इंजीनियरिंग उद्योग की भी माँग बढ़ती है।
धागे तथा तैयार वस्त्र के निर्यात से विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है।
यह देश का एकमात्र उद्योग है जो कच्चे माल से उच्चतम अतिरिक्त मूल्य उत्पाद तक की श्रृंखला में परिपूर्ण एवं आत्मनिर्भर है।
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Question 83 Marks
भारी उद्योग और हल्के उद्योग में अन्तर कीजिए।
Answer
वे उद्योग जिनमें प्रयुक्त कच्चा माल व तैयार माल दोनों भारी होते हैं, वे भारी उद्योग और जिनमें ये दोनों हल्के होते हैं, वे हल्के उद्योग कहलाते हैं।
भारी उद्योग अधिक स्थान घेरने वाले होते हैं जबकि हल्के उद्योग कम स्थान घेरते हैं। भारी उद्योगों में केन्द्रीकरण की प्रवृत्ति पाई जाती है जबकि हल्के उद्योगों का विस्तार सर्वत्र पाया जाता है।
भारी उद्योगों में अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है जबकि हल्के उद्योगों में अपेक्षाकृत कम पूँजी की आवश्यकता होती है। लोहा-इस्पात उद्योग, भारी मशीन उद्योग, सीमेण्ट उद्योग भारी उद्योग हैं; पंखा, साइकिल, पेन, टेलीफोन, रेडियो आदि के उद्योग हल्के उद्योग हैं।
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Question 93 Marks
सीमेण्ट उद्योग में तेजी से हुए विकास के कारणों पर प्रकाश डालिए। 
Answer
सीमेण्ट उद्योग के तीव्र विकास के कारण-
भारत में ग्रामीण और नगरीय दोनों क्षेत्रों में आवास की भारी कमी है। पुलों, बाँधों, भवनों, हवाई अड्डों के निर्माण में सीमेंट का प्रयोग बहुत अधिक होता है।
देश के विभिन्न भागों में आज बड़े तथा छोटे सीमेण्ट कारखानों के द्वारा विविध प्रकार के सीमेंट का उत्पादन किया जाता है।
देश में कच्चे माल के रूप में चूने का पत्थर, सिलिका, एल्यूमिना तथा जिप्सम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
कच्चे माल के उपलब्ध क्षेत्रों में शक्ति के साधन, परिवहन की सुविधा, सस्ते व कुशल श्रम की सुलभता से सीमेण्ट उद्योग का तीव्र विकास हुआ।
गुणवत्ता में सुधार के कारण, भारत की बड़ी घरेलू माँग के अतिरिक्त पूर्वी एशिया, मध्यपूर्व, अफ्रीका तथा दक्षिण एशिया के बाजारों में भी इसकी बहुत माँग है।
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Question 103 Marks
भारत में मोटरगाडी उद्योग का वर्णन कीजिए।
Answer
मोटरगाड़ी उद्योग-मोटरगाड़ी यात्रियों तथा सामान के तीव्र परिवहन के साधन हैं । देश में विभिन्न केन्द्रों पर ट्रक, बस, कार, मोटर साइकिल, स्कूटर, तिपहिया तथा बहुउपयोगी वाहन बनाए जाते हैं। उदारीकरण के उपरान्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के साथ नवीन प्रौद्योगिकी के उपयोग से यह उद्योग विश्वस्तरीय विकास के स्तर पर आ गया है। वर्तमान में नये और आधुनिक मॉडल के वाहनों का बाजार तथा वाहनों की माँग बढ़ी है जिससे इस उद्योग में विशेषकर कार, दोपहिया तथा तिपहिया वाहनों में अपार वृद्धि हुई है। यह उद्योग दिल्ली, गुड़गाँव, मुम्बई, पुणे, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, इन्दौर, हैदराबाद, जमशेदपुर तथा बंगलौर के आसपास स्थित है।
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Question 113 Marks
भारत में एल्यूमिनियम प्रगलन उद्योग का वर्णन कीजिए।
Answer
एल्यूमिनियम प्रगलन उद्योग-भारत में एल्यूमिनियम प्रगलन द्वितीय सबसे महत्त्वपूर्ण धातु शोधन उद्योग है। यह हल्का, जंग अवरोधी, ऊष्मा का सुचालक, लचीला तथा अन्य धातुओं के मिश्रण से अधिक कठोर बनाया जा सकता है। हवाई जहाज बनाने, बर्तन तथा तार बनाने में इसका उपयोग किया जाता है। अनेक उद्योगों में इसका महत्त्व इस्पात, ताँबा, जस्ता व सीसे के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होने से बढ़ा है।
वितरण- वर्तमान समय में देश में 8 एल्यूमिनियम प्रगलन संयन्त्र हैं जो कि नालको व बालको (उड़ीसा), पश्चिमी बंगाल, केरल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र व तमिलनाडु राज्यों में स्थित हैं।
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Question 123 Marks
निजी एवं सहकारी क्षेत्र के उद्योगों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer
निजी एवं सहकारी क्षेत्र के उद्योगों में अन्तर
निजी क्षेत्र के उद्योग सहकारी क्षेत्र के उद्योग
1. निजी क्षेत्र के उद्योगों का स्वामित्व किसी व्यक्ति, फर्म अथवा समूह के पास होता है। 1. सहकारी क्षेत्र के उद्योग कुछ लोगों के समूह द्वारा सहकारिता के आधार पर चलाए जाते हैं।
2. इन उद्योगों में व्यक्ति, फर्म अथवा समूह पूँजी का निवेश करते हैं। 2. इन उद्योगों में हिस्सेदार पूँजी का निवेश करते हैं।
3. इन उद्योगों में लाभ या हानि व्यक्ति, फर्म अथवा समूह को होती है। 3. इन उद्योगों में लाभ-हानि का विभाजन हिस्सेदारों में आनुपातिक रूप से होता है।
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Question 133 Marks
राष्ट्रीय ताप विद्युत गृह द्वारा पर्यावरण प्रबन्धन किस प्रकार किया जाता है? बताइए।
Answer
भारत में राष्ट्रीय ताप विद्युत गृह कॉरपोरेशन विद्युत प्रदान करने वाला मुख्य निगम है। यह निगम निम्न प्रकार पर्यावरण प्रबन्धन करता है-
आधुनिकतम तकनीकों पर आधारित उपकरणों का सही उपयोग करके तथा विद्यमान उपकरणों में सुधार।
अधिकतम राख का इस्तेमाल कर अपशिष्ट पदार्थों का न्यून उत्पादन करना।
पारिस्थितिकी सन्तुलन बनाए रखने के लिए हरित क्षेत्र की सुरक्षा तथा वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करना।
तरल अपशिष्ट प्रबन्धन, राख-युक्त जलीय पुनर्चक्रण तथा राख संग्रह प्रबन्धन द्वारा पर्यावरण प्रदूषण को कम करना।
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Question 143 Marks
भारत में कृषि पर आधारित चार उद्योगों के नाम लिखो। भारतीय अर्थव्यवस्था में इनका क्या महत्त्व है?
Answer
कृषि आधारित उद्योग भारत में कृषि आधारित चार उद्योग ये हैं-
सूती वस्त्र उद्योग, रेशम वस्त्र उद्योग, जूट या पटसन उद्योग तथा , वनस्पति तेल उद्योग।
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि उद्योगों का महत्त्व-
कृषि पर आधारित विभिन्न उद्योगों में करोड़ों लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
कृषि-आधारित उद्योगों का कुल औद्योगिक उत्पादन में सबसे बड़ा भाग है।
ये उद्योग विभिन्न उद्योगों के कच्चे माल के प्रमुख स्रोत हैं।
कृषि पर आधारित उद्योगों ने कृषि पैदावार में बढ़ोतरी को प्रोत्साहित किया है।
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