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लघुउत्तरात्मक प्रश्न [2 M]

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Question 12 Marks
पादप में रासायनिक समन्वय किस प्रकार होता है?
Answer
पादपों में रासायनिक समन्वय पादप हॉर्मोन के द्वारा होते हैं। ये हॉर्मोन पौधों की वृद्धि, विकास एवं पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया के समन्वयन में सहायता प्रदान करते हैं। इनके संश्लेषण का स्थान इनके क्रिया क्षेत्र से दूर होता है और वे साधारण विसरण द्वारा क्रिया क्षेत्र तक पहुँच जाते हैं।
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Question 22 Marks
एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना बनाइए तथा इसके कार्यों का वर्णन कीजिए।
Answer

तंत्रिका कोशिका का चित्र

न्यूरॉन के कार्य-

  1. न्यूरॉन हमारे शरीर के तंत्रिका तंत्र की कार्यात्मक इकाई हैं।
  2. न्यूरॉन हमारे तंत्रिका तंत्र में सूचनाओं का वहन करवाते हैं।
  3. न्यूरॉन सूचनाओं को हमारे शरीर के विभिन्न अंगो से मस्तिष्क तक तथा मस्तिष्क से शरीर के विभिन्न अंगो तक पहुँचाते हैं।
  4. ये कोशिकाएँ उद्दीपन या आवेग के संवहन के लिए विशिष्ट होती है।
  5. इसी तरह का एक सिनेप्स अंतत: ऐसे आवेगों को तंत्रिका कोशिका से अन्य कोशिकाओं जैसे कि पेशी कोशिकाओं या ग्रंथि तक ले जाते हैं। अतः न्यूरॉन एक संगठित जाल का बना होता है, जो सूचनाओं को विद्युत आवेग के द्वारा शरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक संवहन करता है।
  6. उदाहरण के लिए ग्राही संवेदी तंत्रिका कोशिका सूचना ग्रहण कर केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुँचाते हैं तथा यह आवेग को वापस प्रेरक तंत्रिका कोशिका द्वारा पेशी कोशिकाओं या कार्यकर तक पहुँचाती है।
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Question 32 Marks
हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है? ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जहाँ ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों। क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?
Answer
पर्यावरण में प्रत्येक परिवर्तन की अनुक्रिया से एक समुचित गति उत्पन्न होती है जो हमारे आसपास होने की स्थिति में हमें प्रभावित करती है। हमारे शरीर के कुछ अंग उन सूचनाओं को इकट्ठा करते हैं जिन्हें ग्राही अंग या संवेदी अंग या ज्ञानेन्द्रियाँ (sense organs) कहते हैं और वे पर्यावरण के परिवर्तन की सूचना को केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक भेज देते हैं। तंत्रिका तंत्र में मस्तिष्क और सुष्मुना उचित संदेश शरीर के विभिन्न अंगों और ग्रंथियों को प्रेषित कर देते हैं। यदि ग्राही उचित प्रकार से कार्य न कर रहे हों तो वे पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों को नहीं समझ पाएँगे और फिर हमरा तंत्रिका तंत्र उनके प्रति ठीक प्रकार से कोई प्रतिक्रिया नहीं कर सकेगा।
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Question 42 Marks
छुई-मुई पादप में गति तथा हमारी टाँग में होने वाली गति के तरीके में क्या अंतर है?
Answer
छुई-मुई पादप में गति तथा हमारी टाँग में होने वाली गति के तरीके में अंतर:
छुई-मुई पादप में गति टाँग में होने वाली गति
छुई-मुई पादप में गति अदैशिक तथा छूने से होती है। हमारी टाँग में होने वाली गति ऐच्छिक होती है।
पत्तों में गति उनकी आकृति में परवर्तन से होती है, जो उनकी कोशिकाओं में पानी की मात्रा में परिवर्तन से होती है। यह पेशियों के सिकुड़ने तथा फैलने से होती है।
ये गतियाँ अदिशिक गतियाँ होती हैं जो न तो उद्दीपन की दिशा में और न ही उससे परे होती हैं। ये गतियाँ ऐच्छिक होती हैं तथा उद्दीपन की ओर या उससे परे भी हो सकता हैं।
छुई-मुई पादप में गति रासायनिक गतिविधियों के नियंत्रण में होती है। टांग में होने वाली गति तंत्रिका तंत्र के नियंत्रण में होती है।
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Question 52 Marks
जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हॉर्मोन क्रियाविधि की तुलना तथा व्यतिरेक (contrast) कीजिए।
Answer
जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हॉर्मोन क्रियाविधि की तुलना:

तंत्रिका क्रिया विधि हॉर्मोन क्रिया विधि
यह एक्सॉन के अंत में विद्युत आवेग का परिणाम है जो कुछ रसायनों का विमोचन कराता है। यह रक्त के द्वारा भेजा गया रासायनिक संदेश है।
सूचना अति तीव्रगति से आगे बढ़ती है। सूचना धीरे-धीरे गति करती है।
सूचना विशिष्ट एक या अनेक तंत्रों, कोशिकाओं, न्यूरानों आदि को प्राप्त होती है। सूचना सारे शरीर को रक्त के माध्यम से प्राप्त हो जाती है जिसे कोई विशेष कोशिका या तंत्र स्वयं प्राप्त कर लेता है।
इसे उत्तर शीघ्र प्राप्त हो जाता है। इसे उत्तर प्रायः धीरे-धीरे प्राप्त होता है।
इसका प्रभाव कम समय तक रहता है। इसका प्रभाव प्रायः देर तक रहता है।

उपर्युक्त दोनों क्रियाविधियों के कार्यों में निम्नलिखित समानताएँ हैं-

  • ये दोनों ही शरीर के विभिन्न कार्यों के नियंत्रण एवं समन्वय में सहायक हैं।
  • ये दोनों ही शरीर तथा बाह्य वातावरण से संबंध स्थापित करती हैं।
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Question 62 Marks
अनैच्छिक क्रियाएँ तथा प्रतिवर्ती क्रियाएँ एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?
Answer
अनैच्छिक क्रियाओं और प्रतिवर्ती क्रियाओं में भिन्नताएँ:
अनैच्छिक क्रियाएँ प्रतिवर्ती क्रियाएँ
वे क्रियाएँ जो हम अपनी इच्छानुसार सोच-विचार कर भी नहीं कर पाते हैं उन्हें अनैच्छिक क्रियाएँ कहते हैं। अचानक किसी उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया जिसमें मस्तिष्क सम्बद्ध नहीं होता है उसे प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं।
अनैच्छिक क्रियाएँ मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होती हैं। प्रतिवर्ती क्रिया मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित की जाती है।
उदाहरणार्थ- हृदय स्पंदन, रुधिर प्रवाह आदि अनैच्छिक क्रियाएँ हैं। उदाहरणार्थ- जल जाने पर हाथ का स्वयं पीछे हटना प्रतिवर्ती क्रिया है।
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Question 72 Marks
अण्डाशय से स्त्रावित हार्मोन का नाम तथा दो कार्य लिखिए।
Answer
अण्डाशय से स्त्रावित हार्मोन का नाम एस्ट्रोजन (Estrogen) है।
कार्य-एस्ट्रोजन हार्मोन द्वारा मादा में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास होता है। जैसे- (i) स्तनों का विकास, (ii) रजचक्र का प्रारम्भ होना।
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Question 82 Marks
पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है?
Answer
पादप में प्रकाशानुवर्तन (Phototropism):
पादप में प्रकाशानुवर्तन वह प्रक्रिया है जिसमें पौधे के अंग प्रकाश की दिशा में मुड़ते हैं।
यह इस कारण होता है कि पौधे के अंधेरे वाले भाग में ऑक्सिन हार्मोन की मात्रा अधिक हो जाती है, जिससे उस भाग में कोशिकाएँ अधिक बढ़ती हैं और पूरा तना प्रकाश की ओर झुक जाता है।
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Question 92 Marks
गुरुत्वानुवर्तन क्रिया को चित्र सहित समझाइये।
Answer
प्रकाशानुवर्तन :- पर्यावरणीय प्रेरक जैसे प्रकाश आदि पादप की वृद्धि वाले भाग में दिशा परिवर्तित कर देते हैं। इन दिशिक (Directional) या अनुवर्तन (Tropic) गतियों में पादप का प्ररोह (Shoot) प्रकाश की ओर मुड़कर अनुक्रिया करता है तथा जड़ (Root) प्रकाश से दूर मुड़कर अनुक्रिया करती है। यह क्रिया प्रकशानुवर्तन कहलाती है।
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गुरुत्वानुवर्तन :- पर्यावरणीय प्रेरक जैसे गुरुत्व आदि पादप की वृद्धि वाले भाग में दिशा परिवर्तित कर देते हैं। ये दिशिक या अनुवर्तन गतियां उद्दीपन (stimulus) की ओर या उससे विपरीत हो सकती है। हम जानतें हैं कि एक पादप की जड़ सदैव नीचे की ओर तथा प्ररोह प्रायः उपर की ओर अर्थात पृथ्वी से दूर वृद्धि करता है। जड़ में ये अधोगामी वृद्धि (Downward growth) तथा प्ररोह में उपरिगामी वृद्धि (Upward growth) पृथ्वी या गुरुत्व के खिंचाव की अनुक्रिया ही गुरुत्वानुवर्तन है।
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Question 102 Marks
शीर्षस्थ प्रभाविता क्या होती है?###एक पौधा लम्बाई में तो सामान्य वृद्धि कर रहा है लेकिन इसकी पार्श्व शाखाएँ विकसित नहीं हो रही हैं। ऐसा क्यों होता है? आप पौधे की पार्श्व शाखाओं के विकास हेतु क्या सुझाव देंगे?
Answer
प्रायः पौधों में शीर्षस्थ कलिका की उपस्थिति में पार्श्व व कक्षस्थ कलिकाओं की वृद्धि पूर्णरूप से या आंशिक रूप से अवरुद्ध हो जाती है। इस लक्षण को शीर्षस्थ प्रभाविता कहते हैं। यह ऑक्सिन नामक पादप हार्मोन का एक प्रमुख गुण है। ऑक्सिन प्ररोह शीर्ष में स्रावित होता है। इसके प्रभाव से प्ररोह पर स्थित कक्षस्थ / पार्श्व कलिकाओं की वृद्धि रुक जाती है और पौधे में शीर्ष वृद्धि अधिक होती है। यदि शीर्षस्थ कलिका को हटा दिया जाए तो पार्श्व या कक्षस्थ कलिकायें विकसित होने लगती है।
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Question 112 Marks
(i) पादप गति किसे कहते हैं?
(ii) अनुवर्तनी गति एवं अनुचलन गति में कोई दो अन्तर लिखिए।
Answer
(i) पादप गति (Plant Movement)- पौधे या इसके किसी भाग में किसी उद्दीपन के प्रति होने वाली गति को पादप गति कहते हैं।
क्र.संअनुवर्तनी गतिअनुवर्तनी गति
1.इसमें उ‌द्दीपन गति की दिशा का निर्धारण करता है।जबकि इसमें उद्दीपन गति की दिशा का निर्धारण नहीं करता है।
2.यह स्थिर पादपों द्वारा प्रदर्शित वक्रता गति होती है। अतः यह अनुवर्तन गति होती हैइसमें सम्पूर्ण पादप या उसके किसी भाग में स्थान परिवर्तन होता है, अतः यह अनुचलन गति है।
 
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Question 122 Marks
मेहंदी की झाड़ियों को अधिक घनी बनाने के लिए माली उनकी शाखाओं के शीर्ष काट देता है, क्यों
Answer
जब मुख्य स्तम्भ के शीर्ष पर लगी कलिका वृद्धि करती रहती है तो मुख्य स्तम्भ के नीचे लगी पार्श्व कक्षीय कलिकाओं की वृद्धि नहीं हो पाती। इसे शीर्ष प्रमुखता कहते हैं। अतः पार्श्व कलिकाओं की उचित वृद्धि हेतु माली झाड़ियों की शीर्ष कलिकाओं को काट देता है, इससे वे सघन हो जाती हैं।
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Question 132 Marks
मनुष्य में पाये जाने वाले नर हार्मोन (टेस्टोस्टेरॉन) के कोई चार कार्य लिखिए।
Answer
नर हार्मोन (टेस्टोस्टेरॉन) के चार कार्य-
(1) पुरुषों में मूँछ व दाढ़ी आना, स्वर में भारीपन आना, शरीर पर बालों का उगना, अस्थियों एवं पेशियों का मजबूत होना सभी लक्षण इन हार्मोन्स के द्वारा प्रेरित होते हैं। अर्थात् पुरुष में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास करना।
(2) यह शुक्रजनन (Spermatogenesis) में सहायक होता है।
(3) यह हार्मोन यौन आचरण को प्रेरित करता है।
(4) ये हार्मोन्स नर जन्तुओं की त्वचा पर भी प्रभाव डालते हैं, जिससे त्वचा लाल रंग की व मजबूत हो जाती है।
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Question 142 Marks
यदि किसी स्तनी की अवटु ग्रन्थि (थॉयराइड ग्रन्थि) निकाल दें, तो कौनसे प्रभाव दृष्टिगोचर होंगे?
Answer
थॉयराइड ग्रन्थि के हार्मोन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं वसा के उपापचय का शरीर में नियंत्रण तथा कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया के बनने की क्रिया को प्रेरित करते हैं। यह शरीर की वृद्धि तथा हृदय स्पंदन दर को भी नियंत्रित करते हैं। अतः थॉयराइड ग्रन्थि को शरीर से निकाल देने पर उपर्युक्त क्रियाएँ नहीं होंगी तथा इससे स्रावित थायरॉक्सिन हार्मोन की कमी से घेघा, हॉशीमोटो आदि रोग हो जायेंगे।
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Question 152 Marks
प्रतिवर्ती क्रियाओं के कोई पाँच उदाहरण दीजिए।
Answer
प्रतिवर्ती क्रियाओं के उदाहरण-
(1) अचानक तेज आवाज सुनने पर मुँह खुल जाना।
(2) ठंड से सिकुड़ना।
(3) छींकना एवं खाँसना।
(4) अच्छे भोजन को देखने पर लार का स्रावण।
(5) अचानक तेज रोशनी पर आँखों का सिकुड़ना।
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Question 162 Marks
मस्तिष्क के विभिन्न भाग विशिष्ट कार्यों से संबद्ध हैं। मानव मस्तिष्क के उस भाग का नाम लिखिए जो निम्न कार्य करता है-
(i) गंध का ज्ञान, (ii) लार का आना, (iii) उल्टी आना, (iv) साइकिल चलाना, (v) पेन्सिल को उठाना, (vi) पेट पूरा भरा होने की संवेदना।
Answer
(i) गंध का ज्ञान -अग्र मस्तिष्क
(ii) लार का आना- मेडुला
(ii) उल्टी आना -मेडुला
(iv) साइकिल चलाना -अनुमस्तिष्क
(v) पेन्सिल को उठाना -अनुमस्तिष्क
(vi) पेट पूरा भरा होना -अग्रमस्तिष्क

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Question 172 Marks
शरीर में सूचना प्रवाह के माध्यम के रूप में विद्युत आवेग के उपयोग के लिए क्या सीमाएँ हैं?
Answer
1. सर्वप्रथम वे केवल उन्हीं कोशिकाओं तक पहुँचेगा जो तंत्रिका ऊतक से जुड़ा है, शरीर की प्रत्येक कोशिका तक नहीं।
2. एक बार एक कोशिका में विद्युत आवेग जनित होता है तथा संचरित होता है तो पुनः नया आवेग जनित करने के लिए कुछ समय लेगी। अर्थात् कोशिकाएँ सतत विद्युत आवेग न जनित करती हैं और न ही संचरित कर सकती हैं।
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Question 182 Marks
परिधीय तंत्रिका तंत्र किसे कहते हैं?
Answer
वह तंत्र जो कपाल तंत्रिकाओं एवं मेरु तंत्रिकाओं से मिलकर बना हो, उसे परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System) कहते हैं।
(i) कपाल तंत्रिकाएँ (Cranial Nerves)- मनुष्य के मस्तिष्क से निकलने वाली तंत्रिकाओं को कपाल तंत्रिकाएँ कहते हैं। मनुष्य में बारह जोड़ी कपाल-तंत्रिकाएँ पाई जाती है, जिनमें से कुछ संवेदी, कुछ प्रेरक एवं कुछ मिश्रित प्रकार की होती है।
(ii) मेरु तंत्रिकाएँ (Spinal Nerves)- मेरुरज्जु से निकलने वाली तंत्रिकाओं को मेरु तंत्रिकाएँ कहते हैं। मनुष्य में 31 जोड़ी मेरु तंत्रिकाएँ पाई जाती हैं। ये सभी मेरु तंत्रिकाएँ मिश्रित प्रकार की होती हैं।
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Question 192 Marks
किन्हीं तीन पादप हार्मोन का नाम लिखिए एवं प्रत्येक का एक-एक कार्य बताइए।
Answer
तीन पादप हार्मोन्स के नाम एवं कार्य निम्न प्रकार से हैं-
(i) ऑक्सिन हार्मोन-यह वृद्धि हार्मोन है जो कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि में सहायक होता है
(ii) जिब्बेरेलिन हार्मोन -यह भी वृद्धि हार्मोन है। यह तनों की लम्बाई में वृद्धि करता है।
(iii) एब्सिसिक अम्ल-यह वृद्धि का संदमन करने वाला हॉर्मोन है। पत्तियों का मुरझाना इसका उदाहरण है।
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Question 202 Marks
पीयूष ग्रन्थि को मास्टर ग्रन्थि क्यों कहते हैं?
Answer
यह ग्रन्थि मस्तिष्क के निचले तल से लगी रहती है और मटर के दाने के बराबर बड़ी होती है। इस ग्रन्थि से लगभग 13 प्रकार के हार्मोन्स स्रावित होते हैं, जो हमारे शरीर की विभिन्न क्रियाओं पर नियंत्रण रखते हैं। सामूहिक रूप से यह हार्मोन्स 'पिट्यूटिराइन हार्मोन' कहलाते हैं। इस ग्रन्थि द्वारा स्रावित कुछ हार्मोन्स हमारे शरीर की अन्य अन्तःस्रावी ग्रन्थियों का नियमन करते हैं। इस कारण इस ग्रन्थि को 'मास्टर ग्रन्थि' भी कहा जाता है।
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Question 212 Marks
पौधों में प्रकाशानुवर्तन, गुरुत्वानुवर्तन, जलानुवर्तन और रसानुवर्तन का एक-एक उदाहरण लिखें।
Answer
(i) प्रकाशानुवर्तन- पादप के प्ररोह तंत्र का प्रकाश की दिशा में मुड़ना।
(ii) गुरुत्वानुवर्तन-पादप जड़ का नीचे की ओर (पृथ्वी की तरफ) वृद्धि करना।
(iii) जलानुवर्तन-पादप जड़ों की जल की ओर गति।
(iv) रसानुवर्तन -पराग नलिका का बीजाण्ड की ओर वृद्धि करना।
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Question 222 Marks
पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों का ज्ञान हमारे शरीर को किस प्रकार होता है?
Answer
हमारे पर्यावरण से सभी सूचनाओं का पता कुछ तंत्रिका कोशिकाओं के विशिष्टीकृत सिरों द्वारा लगाया जाता है। ये ग्राही प्रायः हमारी ज्ञानेन्द्रियों में स्थित होते हैं, जैसे आंतरिक कर्ण, नाक, जिह्वा आदि। रस संवेदी ग्राही स्वाद का पता लगाते हैं जबकि घ्राणग्राही गंध का पता लगाते हैं।
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Question 232 Marks
प्रकाशानुवर्तन और गुरुत्वानुवर्तन में क्या अन्तर है?
Answer
पादप के प्ररोह तंत्र के द्वारा प्रकाश स्रोत की दिशा में गति करना प्रकाशानुवर्तन कहलाता है, जबकि पौधे के किसी भाग का पृथ्वी के गुरुत्व की ओर अथवा उसके विपरीत दिशा में गति करने को गुरुत्वानुवर्तन कहते हैं। जैसे-तने का ऊपर की ओर तथा जड़ का नीचे की ओर वृद्धि करना।
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Question 242 Marks
मनुष्य में बौनेपन का क्या कारण है?
Answer
मनुष्य में बौनापन पीयूष ग्रन्थि द्वारा स्रावित वृद्धि हार्मोन (GH) की कमी से होता है। वृद्धि हार्मोन हमारे शरीर की अस्थियों तथा ऊतकों की वृद्धि को नियंत्रित करता है। अगर बाल्यावस्था में इस हार्मोन के स्राव में कमी हो जाती है, तो मनुष्य में बौनापन आ जाता है।
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