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3 अंक प्रश्न

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35 questions · self-marked practice — reveal the answer and mark yourself.

Question 13 Marks
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए-
(i) बेन्जीन का फ्रीडेल क्राफ्ट ऐसिटिलीकरण
(ii) गाटरमान कोख ऐल्डिहाइड संश्लेषण
(iii) गाटरमान ऐल्डिहाइड संश्लेषण।
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Question 23 Marks
कारण समझाइए$-$
$(A)$ ऐसीटिक अम्ल, फॉर्मिक अम्ल की तुलना में दुर्बल अम्ल होता है।
$(B)$ कार्बोक्सिलिक अम्लों का क्वथनांक समतुल्य आण्विक द्रव्यमानों वाले ऐल्डिहाइडों से अधिक होता है।
Answer
$(A)$ ऐसीटिक अम्ल में उपस्थित $-CH_3$ समूह के इलेक्ट्रॉन दाता प्रभाव $(+I)$ के कारण यह इसके आयनन से प्राप्त संयुग्मी क्षारक को अस्थायित्व प्रदान करता है जिससे अम्ल की अम्लता कम हो जाती है, क्योंकि अम्ल का आयनन कम हो जाता है जबकि फॉर्मिक अम्ल में ऐसा सम्भव नहीं है इसलिए इसका आयनन अधिक होता है। इसी कारण ऐसीटिक अम्ल, फॉर्मिक अम्ल की तुलना में दुर्बल अम्ल होता है।
$(B)$ कार्बोक्सिलिक अम्लों का क्वथनांक समतुल्य आण्विक द्रव्यमान वाले ऐल्डिहाइडों से अधिक होता है। इसका कारण कार्बोक्सिलिक अम्लों के अणुओं में परस्पर अधिक व्यापक अंतराआण्विक हाइड्रोजन आबंधन द्वारा होने वाला संगुणन है। ये हाइड्रोजन आबंध वाष्प अवस्था में भी पूर्ण रूप से नहीं टूटते। वास्तव में अधिकांश कार्बोक्सिलिक अम्ल वाष्प प्रावस्था तथा ऐप्रोटिक विलायकों में हाइड्रोजन आबन्धन द्वारा द्वितय बनाते हैं। इस प्रकार का हाइड्रोजन आबन्धन ऐल्डिहाइडों में नहीं होता है।
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Question 33 Marks
नाभिकरागी योगज अभिक्रिया में कार्बोनिल कार्बन पर नाभिकरागी आक्रमण से बने चतुष्फलकीय मध्यवर्ती को चित्रित कीजिए।
Answer
नाभिकरागी योगज अभिक्रिया में कार्बोनिल कार्बन पर नाभिक रागी आक्रमण से बने चतुष्फलकीय मध्यवर्ती का चित्रण निम्न प्रकार है-
Image
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Question 43 Marks
निम्न की केवल रासायनिक समीकरण दीजिए ।
(अ) कैनिजारो अभिक्रिया
(ब) ऐल्डॉल संघनन
(स) विकार्बोक्सिलीकरण
(द) हेल वोलार्ड जेलिंस्की अभिक्रिया (HVZ अभिक्रिया)
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 53 Marks
प्रोपेनैल तथा प्रोपेनोन में विभेद करने के लिए प्रयुक्त टॉलेन परीक्षण को समझाइए।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 63 Marks
टॉलन अभिकर्मक किसे कहते है ? इसका क्या उपयोग है। एक उदाहरण दीजिये ।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 73 Marks
ऐसीटेल्डिहाइड बनाने की ऑक्सीकरण एवं उत्प्रेरकीय तथा विहाइड्रोजनीकरण विधियों के रासायनिक समीकरण लिखिए। ऐसीटोन की संघनन अभिक्रिया का समीकरण भी लिखिए।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 83 Marks
फेलिंग अभिकर्मक क्या होते हैं ? रासायनिक समीकरण लिखकर एक उदाहरण द्वारा समझाइये ।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 93 Marks
फॉर्मिक अम्ल बनाने की प्रयोगशाला विधि का अभिक्रिया समीकरण दीजिए। इसके दो अपचायक गुणों को लिखिए।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 103 Marks
निम्न पदों की समीकरण लिखिए ।
(अ) वोल्फ किशनर अपचयन
(ब) क्लीमेन्सन अपचयन
(स) इटार्ड अभिक्रिया
(द) गाटरमान कोच अभिक्रिया
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 113 Marks
(अ) कार्बोनिल यौगिक नाभिक स्नेही योगात्मक अभिक्रिया प्रदर्शित करते है। क्यों ?
(ब) ऐल्डिहाइडो की क्रियाशीलता कीटोन से अधिक क्यों होती है ।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 133 Marks
प्रोपेनैल एवं ब्यूटेनैल के ऐल्डोल संघनन से बनने वाले चार सम्भावित उत्पादों के नाम एवं संरचना सूत्र लिखिए। प्रत्येक में बताइए कि कौन सा ऐल्डिहाइड नाभिकरागी और कौनसा इलेक्ट्रॉनरागी होगा ?
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 143 Marks
निम्न के रासायनिक समीकरण दीजिए-
(अ) स्टीफन अभिक्रिया
(ब) रोजेनमुण्ड अभिक्रिया
(स) नाभिक स्नेही योगात्मक अभिक्रिया
(द) 2,4-DNP परीक्षण
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 153 Marks
निम्न युगलों में कैसे विभेद करेगें-
(अ) प्रोपेनॉल व प्रोपेनॉन
(ब) पेन्टेन-2-ऑन व पेन्टेन-3-ऑन
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 163 Marks
निम्न में कैसे विभेद करेगें-
(अ) एसीटोफीनॉन व बेन्जोफीनॉन
(ब) एथेनैल व प्रोपेनैल
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 173 Marks
मेथेनॉइक अम्ल को एथेनाइक अम्ल में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक अभिक्रियाएं लिखिए।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 183 Marks
(i) निम्नलिखित अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए-
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(ii) ऐसीटोफीनॉन की हाइड्रॉक्सिल ऐमीन के साथ क्रिया से बने दो समावयवियों की संरचना लिखिए।
Answer

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(ii) ऐसीटोफीनॉन की हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ क्रिया से इसका ऑक्सिम बनता है जो कि दो ज्यामितीय समावयवी रूपों में पाया जाता है।
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Question 193 Marks
अणु सूत्र $C_6H_{12}$ युक्त एक ऐल्कीन के ओजोनी अपघटन से दो भिन्न$-$भिन्न यौगिक प्राप्त होते हैं जिनमें से एक यौगिक आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है लेकिन टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता जबकि दूसरा यौगिक टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करता है लेकिन आयोडोफॉर्म परीक्षण नहीं देता तो इस ऐल्कीन तथा उत्पादों के नाम एवं सूत्र बताइए।
Answer
ऐल्कीन के ओजोनी अपघटन से प्राप्त एक यौगिक टॉलेन अभिकर्मक से क्रिया नहीं करता अतः यह कीटोन होना चाहिए लेकिन आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है अतः यह मेथिल कीटोन होगा जबकि दूसरा यौगिक टॉलेन अभिकर्मक से क्रिया करता है अतः यह एक ऐल्डिहाइड होगा चूंकि एल्कीन में छः कार्बन हैं। अतः एक यौगिक ऐसीटोन तथा दूसरा यौगिक प्रोपिऑन ऐल्डिहाइड होगा जो कि निम्नलिखित अभिक्रिया से भी स्पष्ट है$-$
Image
ऐसीटोन $($मेथिल कीटोन$)$ आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है लेकिन प्रोपिऑन ऐल्डिहाइड नहीं।
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Question 203 Marks
बेन्जोइक अम्ल से निम्नलिखित यौगिक किस प्रकार बनाए जाते हैं?
$(i) m-$नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल $(ii) m-$ब्रोमो बेन्जोड़क अम्ल ।
Answer
$(i)$ बेन्जोइक अम्ल को सान्द्र $HNO_3$ तथा सान्द्र $H_2SO_4 ($नाइट्रीकारक मिश्रण$)$ के साथ गरम करने पर $m-$ नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल प्राप्त होता है।
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$(ii) FeBr_3$ की उपस्थिति में बेन्जोइक अम्ल की ब्रोमीन के साथ क्रिया करवाने पर $m-$ब्रोमोबेन्जोइक अम्ल प्राप्त होता है।
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Question 213 Marks
अणुसूत्र $\ce{C4H8O}$ वाला यौगिक हाइड्रेजीन के साथ क्रिया करके हाइड्रेजोन बनाता है तथा यह आयोडीन व $\text{NaOH}$ के साथ क्रिया करके आयोडोफॉर्म बनाता है लेकिन इसकी फेलिंग विलयन से कोई क्रिया नहीं होती तो इस यौगिक की संरचना तथा आवश्यक समीकरण बताइए।
Answer
यौगिक हाइड्रेजीन से क्रिया करता है अतः यह एक कार्बोनिल यौगिक है लेकिन इसकी फेलिंग विलयन के साथ कोई क्रिया नहीं होती अतः यह कीटोन होगा तथा यह आयोडोफॉर्म बनाता है इसलिए यह ब्यूटेनोन $\ce{(CH3COCH2-CH3)}$ मेथिल कीटोन है जो कि अणुसूत्र से भी सिद्ध हो जाता है।
उपरोक्त अभिक्रियाएँ निम्न प्रकार होती हैं$-$
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$\ce{\begin{array}{r} CH3 COCH2 CH3+3I2+4NaOH \longrightarrow CHI3+CH3CH2COONa +3H2O +3NaI \end{array}}$
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Question 223 Marks
निम्नलिखित परिवर्तनों के लिए आवश्यक समीकरण दीजिए-
(i) ऐसीटोफीनॉन से बेंजोइक अम्ल
(ii) प्रोपिओनिक अम्ल से ऐसीटिक अम्ल ।
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Question 233 Marks
कार्बोनिल यौगिकों की नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया की क्रियाविधि की व्याख्या कीजिए।
Answer
नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया की क्रियाविधि $-$ कार्बोनिल यौगिकों में कार्बोनिल समूह ध्रुवीय होता है Image प्रथम पद में नाभिकस्नेही का आक्रमण धनावेशित $($इलेक्ट्रॉन न्यून$)$ कार्बन पर होता है इसी कारण इसे नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया कहते हैं। प्रथम पद में नाभिकस्नेही के आक्रमण की व्याख्या निम्न प्रकार की जा सकती है$-$
Image
प्रथम पद में नाभिकस्नेही के आक्रमण से प्राप्त ऐल्कोक्साइड आयन इलेक्ट्रॉनस्नेही के आक्रमण से प्राप्त कार्बोकैटायन की तुलना में अधिक स्थायी होता है, अतः कार्बोनिल समूह पर प्रथम पद में नाभिकस्नेही का आक्रमण होता है। यह पद उत्क्रमणीय होता है।
नाभिकस्नेही, कार्बोनिल समूह के कार्बन पर उस दिशा से आक्रमण करता है जो कार्बोनिल कार्बन के $sp^2$ संकरित कक्षकों के तल के लम्बवत् होती है तथा इस क्रिया में कार्बन की संकरण अवस्था $sp^2$ से $sp^3$ हो जाती है। इसके पश्चात् द्वितीय पद में इलेक्ट्रॉनस्नेही का आक्रमण होकर योगोत्पाद बन जाता है।
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Question 243 Marks
कार्बोक्सिलिक अम्लों के अम्ल सामर्थ्य पर विभिन्न प्रतिस्थापियों के प्रभाव की विवेचना कीजिए।
Answer
कार्बोक्सिलिक अम्लों के अम्ल सामर्थ्य पर प्रतिस्थापियों का प्रभाव - कार्बोक्सिलिक अम्लों के आयनन से प्राप्त कार्बोक्सिलेट आयन जितना अधिक स्थायी होता है साम्य उतना ही अग्र दिशा में विस्थापित होता है जिससे हाइड्रोजन आयन $( H ^{+})$ अधिक बनते हैं अतः अम्लीय प्रबलता में वृद्धि होती है।
कार्बोक्सिलिक अम्ल में उपस्थित प्रतिस्थापी कार्बोक्सिलेट आयन $($ संयुग्मी क्षारक $)$ के स्थायित्व को प्रभावित करते हैं अतः इनसे इनके अम्लीय सामर्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है।
इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाले समूह $(-I$ प्रभाव या $EWG)$ कार्बोक्सिलेट आयन के स्थायित्व को बढ़ाते हैं क्योंकि ये साझित इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं जिससे ऋणावेशित ऑक्सीजन परमाणु का इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है अर्थात् ऋणावेश का विस्थानीकरण हो जाता है। अतः अम्ल की अम्लीय प्रबलता बढ़ जाती है।
विभिन्न समूहों के -I प्रभाव का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार होता है-
$\ce{ C _6 H _5-< OCH _3< OH < I < Br < Cl < F < CN < NO _2< CF _3 } (-I$ प्रभाव $)$
इसके विपरीत इलेक्ट्रॉन दाता समूह $(+I$ प्रभाव या $EDG)$ के कारण कार्बोक्सिलेट आयन का स्थायित्व कम हो जाता है क्योंकि यह ऑक्सीजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व को बढ़ा देता है, जिससे इसकी क्रियाशीलता बढ़ जाती है अतः अम्ल की अम्लीय प्रबलता कम हो जाती है।
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Question 253 Marks
कार्बोक्सिलिक अम्लों के अम्लीय गुणों की व्याख्या कीजिए।
Answer
अम्लीय गुण $-$ कार्बोक्सिलिक अम्ल, क्षारों के साथ क्रिया करके लवण बनाते हैं जिससे इनके अम्लीय गुण की पुष्टि होती है। कार्बोक्सिलिक अम्लों के अम्लीय गुण की व्याख्या निम्न प्रकार की जा सकती है$-$
कार्बोक्सिलिक अम्ल$, \text{(RCOOH)}$ जल में आयनित होकर $RCO \overline{ O } ($कार्बोक्सिलेट आयन$)$ तथा $H _3 \stackrel{+}{ O } ($हाइड्रोनियम आयन$)$ बनाते हैं। $RCO \overline{ O }$ अनुनाद के कारण स्थायी हो जाता है।
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अम्लों की सामर्थ्य को सामान्यतः $K_a$ मान की अपेक्षा $pK_a$ के मान से दर्शाते हैं
$pK _{ a }=-\log K _{ a }$
किसी अम्ल का $PK_a$ मान जितना कम होता है वह उतना ही $a$ प्रबल अम्ल होता है।
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Question 263 Marks
एस्टरीकरण अभिक्रिया की क्रियाविधि को समझाइए।
Answer
एस्टरीकरण की क्रियाविधि - कार्बोक्सिलिक अम्लों से एस्टर बनने की अभिक्रिया की व्याख्या निम्नलिखित क्रियाविधि की सहायता से की जा सकती है। समस्थानिक ऑक्सीजन $\binom{18}{O}$ युक्त यौगिकों के प्रयोग से यह सिद्ध हो गया है कि इस अभिक्रिया में बने जल में -OH समूह अम्ल से आता है न कि ऐल्कोहॉल से।
कार्बोक्सिलिक अम्लों की ऐल्कोहॉलों के साथ क्रिया द्वारा एस्टरों का बनना एक नाभिकस्नेही ऐसिल प्रतिस्थापन अभिक्रिया है। इसमें पहले कार्बोक्सिलिक अम्ल में उपस्थित कार्बोनिल समूह की ऑक्सीजन का प्रोटोनीकरण (Protonation) होता है, जिससे कार्बोनिल समूह, ऐल्कोहॉल के नाभिकस्नेही योग के लिए सक्रिय हो जाता है। इसके पश्चात् ऐल्कोहॉल के योग से बने मध्यवर्ती में प्रोटॉन का स्थानान्तरण - OH समूह को $-\stackrel{+}{ O } H _2$ में परिवर्तित कर देता है जो कि एक आसानी से निकलने वाला समूह होने के कारण, जल के अणु के रूप में निकल जाता है तथा इस प्रकार बना प्रोटॉनित एस्टर प्रोटॉन को त्यागकर एस्टर बना देता है।
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Question 273 Marks
ऐसीटोन की $\text{HCN}$ तथा $NaHSO_3$ के साथ अभिक्रियाएँ बताइए।
Answer
$(i)$ ऐसीटोन की $\text{HCN}$ के साथ क्रिया से ऐसीटोन सायनोहाइड्रिन प्राप्त होता है। शुद्ध $\text{HCN}$ के साथ यह अभिक्रिया धीमी गति से होती है; अतः यह अभिक्रिया क्षार की उपस्थिति में करवायी जाती है।
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$(ii)$ ऐसीटोन की $NaHSO_3$ के साथ क्रिया से ऐसीटोन सोडियमहाइड्रोजनसल्फाइट $($योगोत्पाद$)$ बनता है।
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Question 283 Marks
नाभिकस्नेही संकलन अभिक्रिया के लिए कार्बोनिल यौगिकों की अभिक्रियाशीलता की व्याख्या कीजिए।
Answer
नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया के लिए कार्बोनिल यौगिकों की अभिक्रियाशीलता - इलेक्ट्रॉनिक तथा त्रिविम विन्यासी प्रभावों के कारण नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया के लिए ऐल्डिहाइड की क्रियाशीलता कीटोन से अधिक होती है क्योंकि ऐल्डिहाइडों में कार्बोनिल समूह के कार्बन से केवल एक ऐल्किल समूह जुड़ा होता है जबकि कीटोन में दो ऐल्किल समूह जुड़े होते हैं, जिनकी त्रिविम विन्यासी बाधा के कारण कार्बोनिल कार्बन पर नाभिकस्नेही का आक्रमण मुश्किल हो जाता है तथा इन ऐल्किल समूहों के धनात्मक प्रेरणिक प्रभाव (+I प्रभाव) के कारण ये कार्बोनिल कार्बन के धनावेश को कम कर देते हैं जिसके कारण नाभिकस्नेही के आक्रमण की सम्भावना कम हो जाती है।
ऐल्डिहाइड तथा कीटोन दोनों में ऐल्किल समूहों का आकार बढ़ने पर इनकी क्रियाशीलता कम होती जाती है, क्योंकि +I प्रभाव तथा त्रिविम विन्यासी बाधा बढ़ती है।
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Question 293 Marks
निम्नलिखित कार्बोनिल यौगिकों का अम्लीय $KMnO_4$ या अम्लीय $K_2Cr_2O_7$ से ऑक्सीकरण करवाने पर प्राप्त उत्पाद बताइए-
(i) $CH _3 CHO$
(ii) $CH _3 COCH _3$
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Question 303 Marks
एथेनैल की निम्नलिखित के साथ अभिक्रियाओं को समझाइए$-$
$(i) C_2H_5NH_2$
$(ii)$ फेनिल हाइड्रेजीन
$(iii)$ सेमीकार्बेजाइड।
Answer
$(i)$ एथेनैल की $C_2H_3NH,$ के साथ क्रिया कराने पर एक शिफ क्षारक बनता है।
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Question 313 Marks
प्रोपेनैल एवं ब्यूटेनैल के एल्डोल संघनन से बनने वाले चार संभावित उत्पादों के नाम एवं संरचना सूत्र लिखिए। प्रत्येक में बताइए कि कौन-सा ऐल्डिहाइड नाभिकरागी और कौन-सा इलेक्ट्रॉनरागी होगा?
Answer
प्रोपेनैल एवं ब्यूटेनैल के ऐल्डोल संघनन से बनने वाले चार उत्पाद निम्नलिखित हैं-
(i) प्रोपेनैल से बना उत्पाद-
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(ii) ब्यूटेनैल से बना उत्पाद-
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(iii) प्रोपेनैल नाभिकरागी तथा ब्यूटेनैल इलेक्ट्रॉनरागी होने पर बना उत्पाद -
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(iv) ब्यूटेनैल नाभिकरागी तथा प्रोपेनैल इलेक्ट्रॉनरागी होने पर बना उत्पाद-
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Question 323 Marks
पद (शब्द) का वर्णन करो-
कैनिज़ारो अभिक्रिया
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Question 333 Marks
यौगिक युगल में विभेद करने के लिए सरल रासायनिक परीक्षणों को दीजिए-
प्रोपेनैल एवं प्रोपेनोन
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Question 343 Marks
निम्नलिखित यौगिकों को उनसे सम्बन्धित (कोष्ठकों में दिए गये) गुणधर्मों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
(i) ऐसीटैल्डिहाइड, ऐसीटोन, डाइ-तृतीयक ब्यूटिलकीटोन, मेथिलतृतीयक ब्यूटिलकीटोन (HCN के प्रति अभिक्रियाशीलता)।
(ii) CH3CH2CH(Br)COOH,
CH3CH(Br)CH2COOH, (CH3)2CHCOOH, CH2CH2CH2COOH (अम्लता के क्रम में)। 
(iii) बेन्जोइक अम्ल; 4-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल; 3,4-डाईनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल; 4-मेथॉक्सी बेन्जोइक अम्ल (अम्लता की सामर्थ्य के क्रम में)।
Answer
(i) ऐल्डिहाइड तथा कीटोन की नाभिकरागी संकलन के लिए क्रियाशीलता +I प्रभाव तथा त्रिविम विन्यासी बाधा पर निर्भर करती है। अतः इनकी HCN के प्रति अभिक्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार होगा-डाइ तृतीयक < ब्यूटिल कीटोन मेथिल तृतीयक ब्यूटिल कीटोन < ऐसीटोन < ऐसिटैल्डिहाइड
(ii) कार्बोक्सिलिक अम्लों का अम्लीय गुण, प्रेरणिक प्रभाव (+I तथा -I) तथा विभिन्न समूहों की स्थिति पर निर्भर करता है। अतः इनके अम्लीय गुण का क्रम निम्न प्रकार होगा-
$\begin{aligned}\left( CH _3\right)_2 CHCOOH & < CH _3 CH _2 CH _2 COOH < CH _3 CH ( Br ) CH _2 COOH  < CH _3 CH _2 CH ( Br ) COOH \end{aligned}$
(iii) 4-मेथॉक्सीबेन्जोइक अम्ल < बेन्जोइक अम्ल < 4-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल < 3,4-डाइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
$\quad$$\quad$(अम्लता की सामर्थ्य का बढ़ता क्रम)
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Question 353 Marks
एक कार्बनिक यौगिक जिसका अणुसूत्र C9H10O है 2,4 DNP व्युत्पन्न बनाता है, टॉलेन अभिकर्मक को अपचित करता है तथा कैनिजारो अभिक्रिया देता है। प्रबल ऑक्सीकरण पर वह 1, 2-बेन्ज़ीनडाईकार्बोक्सिलिक अम्ल बनाता है। यौगिक को पहचानिए।
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