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यदि सीज़ियम का कार्य-फलन 2.14 $\mathrm{eV}$ है तो परिकलन कीजिए:

  1. सीज़ियम की देहली आवृत्ति तथा
  2. आपतित प्रकाश का तरंगदैर्घ्य

यदि प्रकाशिक धारा को 0.60 V का एक निरोधी विभव लगाकर शून्य किया जाए।

यदि परिपथ को 110 V, 12 KHz आपूर्ति से जोड़ा जाए तो

  1. परिपथ में अधिकतम धारा कितनी है? तथा
  2. धारा शीर्ष व वोल्टेज शीर्ष के बीच समय-पश्चता कितनी है?

इससे इस कथन की व्याख्या कीजिए कि अति उच्च आवृत्तियों पर एक संधारित्र चालक होता है। इसकी तुलना उस व्यवहार से कीजिए जो किसी dc परिपथ में एक संधारित्र प्रदर्शित करता है।

'L' लम्बाई की एक चालक छड़ समरूप चुम्बकीय क्षेत्र 'B' में क्षेत्र के लम्बवत एक नियत कोणीय वेग 'w' से घूर्णन कर रही है। तो छड़ के सिरों के मध्य प्रेरित विद्युत वाहक बल का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
क्लासिकी रूप में किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर किसी भी कक्षा में हो सकता है। तब प्रारूपी परमाण्वीय साइज किससे निर्धारित होता है? परमाणु अपने प्ररूपी साइज की अपेक्षा दस हजार गुना बड़ा क्यों नहीं है? इस प्रश्न ने बोर को अपने प्रसिद्ध परमाणु मॉडल, जो अपने पाठ्य-पुस्तक में पढ़ा है, तक पहुँचने से पहले बहुत उलझन में डाला था। अपनी खोज से पूर्व उन्होंने क्या किया होगा, इसका अनुकरण करने के लिए हम मूल नियतांकों की प्रकृति के साथ निम्न गतिविधि करके देखें कि क्या हमें लम्बाई की विमा वाली कोई राशि प्राप्त होती है, जिसका साइज, लगभग परमाणु के ज्ञात साइज $\left(\sim 10^{-10} \mathrm{~m}\right)$के बराबर है।
  1. मूल नियतांकों e, me, और c से लम्बाई की विमा वाली राशि की रचना कीजिए। उसका संख्यात्मक मान भी निर्धारित कीजिए।
  2. आप पायेंगे कि (a) में प्राप्त लम्बाई परमाण्वीय विमाओं के परिमाण की कोटि से काफी छोटी है। इसके अतिरिक्त इसमें c सम्मिलित है। परन्तु परमाणुओं की ऊर्जा अधिकतर अनापेक्षिकीय क्षेत्र (nonrelativistic domain) में है जहाँ c की कोई अपेक्षित भूमिका नहीं है। इसी तर्क नले बोर को c का परित्याग कर सही परमाण्वीय साइज को प्राप्त करने के लिए 'कुछ अन्य' देखने के लिए प्रेरित किया। इस समय प्लांक नियतांक h का कहीं और पहले ही आविर्भाव हो चुका था। बोर की सूक्ष्मदृष्टि ने पहचाना कि h, me, और e के प्रयोग से ही सही परमाणु साइज प्राप्त होगा। अतः h, me} और e से ही लम्बाई की विमा वाली किसी राशि की रचना कीजिए और पुष्टि कीजिए कि इसका संख्यात्मक मान, वास्तव में सही परिमाण की कोटि का है।
(अ) नैज अर्द्धचालकों में विद्युत चालन की व्याख्या करते हुये धारा घनत्व के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
(ब) एक पूर्ण तरंग दिष्टकारी के लिए निवेशी एवं निर्गत संकेतों का तरंग प्रतिरूप चित्र द्वारा दर्शाइये।
  1. एक न्यूट्रॉन, जिसकी गतिज ऊर्जा 150 eV है, का डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य प्राप्त कीजिए। इतनी ऊर्जा का इलेक्ट्रॉन किरण-पुंज क्रिस्टल विवर्तन प्रयोग के लिए उपयुक्त है। क्या समान ऊर्जा का एक न्यूट्रॉन किरण-पुंज इस प्रयोग के लिए समान रूप में उपयुक्त होगा? स्पष्ट कीजिए। $\left(m_{n}=1.675 \times 10^{-27} \mathrm{~kg}\right)$ 
  2. कमरे के सामान्य ताप $\left(27^{\circ} \mathrm{C}\right)$ पर ऊष्मीय न्यूट्रॉन से जुड़े डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए। इस प्रकार स्पष्ट कीजिए कि क्यों एक तीव्रगामी न्यूट्रॉन को न्यूट्रॉन-विवर्तन प्रयोग में उपयोग में लाने से पहले वातावरण के साथ तापीकृत किया जाता है।
एक लम्बी परिनालिका के स्वप्ररेण का व्यंजक ज्ञात कीजिए। आवष्यक चित्र बनाइए।
एक इलेक्ट्रॉन पुंज E तीव्रता के विद्युत क्षेत्र एवं B तीव्रता के चुम्बकीय क्षेत्रों के क्रॉसित क्षेत्र (crossed region) में प्रवेश करता है। इलेक्ट्रॉन की किस चाल के लिए इलेक्ट्रॉन पुंज अविचलित रहेगा?
एक 3.0 cm लम्बा तार जिसमें 10 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है, एक परिनालिका के भीतर उसके अक्ष के लम्बवत् रखा है। परिनालिका के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र का मान 0.27 T है। तार पर लगने वाला चुम्बकीय बल क्या होगा?
दूरदर्शी के लिए आवर्धन का सूत्र लिखिए ।