Question
स्वेदश प्रेम

Answer

देश से स्वाभाविक लगाव-जिस देश में हम जन्मे हैं, जिस धरती का हमने अन्न-जल लिया है, जिसकी रज में हम खेल-कूदकर बड़े हुए हैं, उसके प्रति हमारा स्वाभाविक लगाव हो जाता है। यही स्वाभाविक लगाव ‘देश-प्रेम’ कहलाता है। देश-प्रेम का अर्थ है देश के कण-कण से प्रेम होना, उसके पेड़-पौधे, पत्थर, जीव-जंतु और सभी मानवों से प्रेम होना। कुछ लोग देश के लिए मरने वालों को ही देश-प्रेमी मानते हैं। यह धारणा गलत है। असली देश-प्रेमी वही है जो स्वदेश-हित के लिए जीता है और आवश्यकता पड़ने पर जान भी दे देता है।
मातृभूमि ‘माँ’ के समान संस्कृत की उक्ति है ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ अर्थात् माता और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान है। बिना स्वदेश के जीवन धारण करना ही कठिन है। इसीलिए देश को माँ की संज्ञा दी जाती है। जिस प्रकार हमारे अपनी माँ के प्रति कुछ कर्तव्य और स्नेह-संबंध होते हैं, वैसे ही अपने देश के प्रति भी कुछ दायित्व होते हैं। देश-भावना से शून्य व्यक्ति समाज पर बोझ होता है। मैथिलीशरण गुप्त के अनुसार-
है भरा नहीं जो भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं।
वह हृदय नहीं, वह पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥
बलिदान की उच्च भावना–देश-प्रेम की भावना बड़ी उच्च भावना है। उसी भावना से प्रेरित होकर देशभक्त देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं। क्या नहीं था महाराणा प्रताप के पास? धन, धरती, वैभव, सिंहासन -और यदि वे मानसिंह की भाँति अकबर से समझौता . कर लेते तो और भी क्या नहीं मिलता?….लेकिन फिर वह कौन-सी तड़प थी कि हल्दीघाटी के युद्ध-तीर्थ पर उन्होंने सब बलिवेदी पर चढ़ा दिया; वन-वन भटके, गुफाओं में रहे, घास की रोटियाँ खाई ? वह थी देश-प्रेम की तीव्र अभिलाषा। स्वतंत्रता-संग्राम के समय कितने ही देश-भक्तों ने जेल की यातनाएँ भोगी, हँसते-हँसते लाठियाँ खाईं, दिन का चैन और रात की नींद गवाई और सहर्ष फाँसी के तख्तों को चूम लिया। यह देश-प्रेम ही तो था कि लाला लाजपतराय ने छाती चौड़ी कर क्रूर अंग्रेजों की लाठियाँ खाईं, सुभाष बाबू ने विदेश में जाकर आजाद हिंद फौज का गठन किया तथा नेहरू ने ऐश्वर्य और वैभव के जीवन को ठुकरा दिया। संसार के अन्य देशों के इतिहास भी देश-प्रेम की गाथाओं से रँगे पड़े हैं।
राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक – देश-प्रेम की भावना राष्ट्रीय एकता के लिए परम आवश्यक है। आज देश जाति, भाषा, वर्ण, वर्ग, प्रांत, दल आदि के नाम पर बँटा हुआ है। सारा देश टूटता हुआ नजर आ रहा है। ऐसे समय में देशभक्ति की भावना इस टूटन और बिखराव को दूर करके सारे देश को एकजुट कर सकती है।

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