प्रस्तावना - वर्तमान काल में कुछ दकियानूसी सोच वाले लोग बेटा या पुत्र को कुलदीपक और बुढ़ापे की लाठी मानते हैं, तो बेटी को मुसीबत की जड़ समझते हैं। ऐसे ही लोग कन्या-जन्म को अशुभ मानते हैं।
सामाजिक चेतना का प्रसार - समाज का सही विकास हो, लोगों में नयी चेतना का प्रसार हो, इस दृष्टि से सरकार ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा दिया है। साथ ही सरकार लिंग परीक्षण को प्रतिबन्धित कर, कन्या-जन्म और उसकी शिक्षा-व्यवस्था पर पूरा ध्यान दे रही है।
अभियान एवं उद्देश्य - 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के सम्बन्ध में हमारे राष्ट्रपति ने लोकसभा के दोनों सदनों को संयुक्त रूप से जून, 2014 को सम्बोधित किया। उसमें उन्होंने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देकर उसके संरक्षण और सशक्तीकरण पर जोर दिया।
उपसंहार - 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के माध्यम से हमारे समाज में जागरूकता के साथ ही रूढ़िवादी सोच में भी परिवर्तन आने लगा है। वह दिन अब दूर नहीं है जब बेटियों को समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त हो सकेगा।