प्रस्तावना - 'परि' का आशय चारों ओर तथा 'आवरण' का आशय प्राकृतिक परिवेश है।
पर्यावरण संरक्षण की समस्या - विज्ञान की असीमित प्रगति तथा नये आविष्कारों की स्पर्धा के कारण प्रकृति का सन्तुलन बिगड़ गया है। दूसरी ओर, जनसंख्या की निरन्तर वृद्धि, औद्योगीकरण, शहरीकरण, हरे पेड़ों की कटाई, प्राकृतिक संसाधनों का दोहन, यातायात के साधनों से निकलने वाला धुआँ, आदि से पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ रहा है।
पर्यावरण संरक्षण का महत्त्व - पर्यावरण संरक्षण का समस्त प्राणियों के जीवन तथा इस धरती के समस्त प्राकृतिक परिवेश से घनिष्ठ सम्बन्ध है। प्रदूषण से मानव सभ्यता के भविष्य पर खतरा मँडराने लगा है।
पर्यावरण संरक्षण के उपाय - पेड़-पौधों को बहुसंख्या में लगाया जाना चाहिए। नदियों की स्वच्छता, गैसीय पदार्थों का उचित विसर्जन, गन्दे जल-मल का परिशोधन, जनसंख्या नियंत्रण आदि अनेक उपाय किए जा सकते हैं।
उपसंहार - पर्यावरण संरक्षण किसी एक व्यक्ति या एक देश का काम नहीं है। यह समस्त विश्व के लोगों का कर्तव्य है।