Question
भारतीय खेलों का भविष्य

Answer

भमिका- भारत आध्यात्मिक देश हैं यह संतो-ऋषियों की भूमि है। यहाँ महत्त्व ज्ञान को दिया गया। आज भी भारत के माता-पिता अपने बच्चों को इंजीनियर, डॉक्टर, प्रोफेसर, वकील, पत्रकार आदि बनाना चाहते हैं। खिलाड़ी कोई नहीं बनाना चाहता। यदि कोई बच्चा खेलों में अधिक रूचि लेता पाया जाए तो उसे माता-पिता से डाँट सुनने को मिलती है। भारत के लोग अब भी खेलों में भविष्य नहीं मानते। यही कारण है कि यहाँ खेलों का विकास नहीं हो पाता।
खेलों में भारत की वर्तमान स्थिति – खेल-जगत में भारत का स्थान निराशाजनक है। 110 करोड़ आबादी वाला देश किसी भी खेल में चैंपियन नहीं है। आज क्रिकेट में भारत ने दबदबा तो दिखाया है किंतु यह स्थायी नहीं है। हॉकी में कभी हमारा देश विश्व-चैंपियन होता था। इस बार हम ओलंपिक के लिए क्वालीफाई भी नहीं कर पाए। टेनिस, लॉन टेनिस, कुश्ती, तैराकी, मुक्केबाजी, फुटबाल, बैंडमिंटन, वालीबॉल-किसी भी खेल में हमारा नाम तक नहीं है।
2008 के बीजिंग ओलंपिक में जहाँ लगभग 1000 पदक दाँव पर थे, भारत ने केवल तीन पदक प्राप्त किए। हमने 302 खेलों में से केवल 12 खेलों में ही भाग लिया। इसके लिए न तो हमारी सरकार चिंतित है, न समाज और न स्वतंत्र अकादमियाँ।
खेल-प्रोत्साहन के उपाय- प्रश्न है कि खेलों को प्रोत्साहन कैसे मिले? इसके अनेक उपाय हैं। खेलों को भी ‘भविष्य’ के रूप में स्थापित किया जाए। जिस प्रकार नए-नए इंजीनियरिंग . कॉलेज, मैडिकल कॉलेज, मैनेजमेंट कॉलेज खुल रहे हैं, वैसे ही खेल-अकादमियाँ और प्रशिक्षण-संस्थान खोले जाएँ। वहाँ खेल-आधारित पाठ्यक्रम हों। वहाँ नियुक्त स्टाफ को सम्मानपूर्ण धन दिया जाए।
दूसरा उपाय यह है कि शिक्षा में खेलों को अनिवार्य अंग बनाया जाए। बच्चे के प्रमाण-पत्र और चरित्र में शिक्षा-ज्ञान, खेल और कला-तीनों के अंक निर्धारित होने चाहिए। ऐसा होने पर बच्चे के मां-बाप.बच्चे को खेलों के लिए भी प्रोत्साहित करेंगे।
तीसरा उपाय यह है कि जिए प्रकार गीत-संगीत, नाटक, नृत्य, फैशन आदि को प्रोत्साहन देने के लिए समाज में अनेक संस्थाएं बनी हैं। वे संस्थाएँ प्रतियोगिता कराकर, पुरस्कार, सम्मान या प्रदर्शन के अवसर देकर प्रोत्साहन देती हैं, उसी प्रकार खेलों के लिए भी संस्थाएं आगे आएं।
भविष्य – खेलों को लेकर अभी तक भारतवासियों का रवैया बहुत उत्साहप्रद नहीं है। इसलिए सरकारें भी लगभग मौन हैं। अभी भारत को खेलों के विकास के लिए और कुछ वर्षों तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। अभी दो-तीन किरणें फूटी हैं पूरा सूरज खिलने में अभी देर है।

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