भ्रष्टाचार का अर्थ है भ्रष्ट आचरण । भ्रष्टाचार आज हमारे देश की ज्वलंत समस्या है। आज जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं बचा है जहाँ भ्रष्टाचार का बोलबाला न हो। सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। नेता, मंत्री और अफ़सर ही नहीं, कार्यालय का चपरासी तक भ्रष्ट है। इसका सबसे बड़ा कारण लोगों का नैतिक पतन और लोभ है, जिसे जब मौका मिलता है बेईमानी और रिश्वत खोरी पर उतर आता है। ऐसे में देश का ईश्वर ही मालिक है। जो रक्षक है, वही भक्षक बने बैठे हैं। इसके चलते देश का बेड़ा गर्क हो रहा है। अतः आवश्यक है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन आंदोलन चलाया जाए। साथ-ही-साथ आम लोग भी इसका प्रण लें कि ये न तो भ्रष्टाचार में लिप्त होंगे और न ही भ्रष्टाचारियों को किसी प्रकार का प्रोत्साहन ही देंगे।