प्रस्तावना - हिन्दुओं के त्योहारों में रक्षाबन्धन, दशहरा, दीपावली और होली प्रमुख त्योहारों के रूप में गिने जाते हैं। इन त्योहारों में होली का अपना महत्त्वपूर्ण स्थान है।
विशिष्ट त्योहार - माघ की पूर्णिमा को होलिका-रोपण होता है तथा फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली मनाई जाती है।
मनाने का तरीका - इस अवसर पर नये पके हुए अन्न को होली की आग में भूनते हैं और इस भुने हुए अन्न अर्थात् आखतों को आपस में वितरित करते हैं। संस्कृत भाषा में आग में भूने हुए अधपके अन्न को 'होलक' कहते हैं। इसी कारण से इस त्योहार को 'होलिकोत्सव' या होली कहते हैं।
होली खेलना - होलिका-दहन के बाद लोग रंग-अबीर से होली खेलते हैं। अपराह्न में स्नान, भोजन, इत्यादि करने के बाद सभी लोग नवीन वस्त्र धारण कर एक-दूसरे के यहाँ जाते हैं और मिलकर शुभकामनाएँ व्यक्त करते हैं।
उपसंहार - ब्रज में कई दिनों तक होली खेली जाती है। ब्रज की लट्ठमार होली बहुत प्रसिद्ध है। यह रंगों का मनभावन त्योहार मेल-मिलाप के त्योहार के रूप में प्रसिद्ध है।