प्रस्तावना - प्राचीन काल में नारी को जो सम्मान प्राप्त था, वह मध्यकाल में घट गया था। परन्तु वर्तमान में नारी वह सम्मान पुनः प्राप्त करने में आगे आ रही है।
नारी का प्राचीन स्वरूप - वैदिक काल में भारतीय नारी का स्वरूप बहुत ही सम्मानीय था। उच्च शिक्षा प्राप्त करने का उन्हें अधिकार था। गार्गी, मैत्रेयी आदि विदुषी नारियों के उदाहरण इस बात के गवाह हैं।
मध्यकाल में भारतीय नारी - मध्यकाल में भारतीय नारी को स्वतन्त्रता का अधिकार नहीं दिया गया। उसे पर्दे में अथवा घर की चहारदीवारी में ही रहने को विवश किया गया। इस तरह उसका जीवन अत्यन्त दयनीय रहा।वर्तमान युग की नारी - आजादी प्राप्त करने के बाद भारतीय नारी की शिक्षा एवं रहन-सहन पर ध्यान दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि नारी भी पुरुषों के समान डॉक्टर, वकील, जज, मन्त्री, अधिकारी, समाजसेविका एवं उद्यमी आदि सभी पदों पर कुशलता से कार्य कर रही है।
उपसंहार - नारी को अपनी क्षमताओं के आधार पर यह विचार करना चाहिए कि वह अबला नहीं सबला है।