प्रस्तावना - विद्यालय की पढ़ाई का दबाव कम करने के लिए हम खेल या मनोरंजन करने की योजना बनाते हैं। इसी दृष्टि से हमारी कक्षा के छात्रों ने गत माह स्कूलपिकनिक पर जाने की सोची। कक्षाचार्य ने इसका अनुमोदन किया और मुख्याचार्य ने जाने की आज्ञा दी।
पिकनिक के लिए प्रस्थान - दूसरे दिन कक्षा के चालीस छात्र आवश्यक भोजन-सामग्री लेकर स्कूल बस द्वारा कक्षाचार्य के साथ पिकनिक स्थान 'कृष्ण मन्दिर' के लिए प्रातः छह बजे रवाना हुए। पहाड़ी पर स्थित मन्दिर, कृष्णापुरा गाँव में हमारे यहाँ से लगभग अस्सी किलोमीटर दूर था।
मार्ग का दृश्य - बस में गाकर अन्त्याक्षरी खेलते हुए मार्ग के मनोहर दृश्य हरे-भरे खेत, चरते हुए पशु, जलपूरित तालाब आदि देखते हुए डेढ़ घण्टे के बाद पिकनिक स्थल पर पहुंचे।
मन्दिर का दृश्य - पहाड़ी पर चढ़कर हम मन्दिर परिसर में पहुँचे। वृक्षों की शीतल छाया में आए दर्शनार्थियों के बीच में विश्राम किया। हाथ-मुँह को धोकर साथ लाये भोजन को किया। मन्दिर में जाकर दर्शन किए, प्रसाद चढ़ाया, दक्षिणा दी। सूर्यास्त के समय पहाड़ियों के बीच ढलते सूर्य के दर्शन किए। चाय-नाश्ता करके बस द्वारा रवाना होकर रात्रि आठ बजे अपने-अपने घर पहुंचे।
उपसंहार - मानसिक थकान को दूर करने के लिए प्रकृति का सान्निध्य आनन्ददायक है। इसकी पुष्टि विज्ञान भी करता है। पिकनिक का उद्देश्य प्रकृति का आनन्द लेना ही तो है।