प्रस्तावना - हमारे देश में प्राचीन समय से पंचायत प्रणाली प्रचलित है। पंचायतों में अन्य सदस्य पंच कहलाते हैं, उनमें मुखिया को सरपंच कहा जाता है।
सरपंच का चयन - गाँव के सरपंच का चुनाव मतदान प्रक्रिया से होता है। जो आदमी योग्य तथा उस गाँव का निवासी होता है और पंचायत क्षेत्र का मतदाता होता है, वह सरपंच पद का उम्मीदवार बन सकता है। सरपंच के सम्मानित पद को देखकर मेरी इच्छा होती है कि मैं सरपंच होता तो कितना अच्छा होता।
कर्तव्य पालन - (1) मैं सरपंच होने के नाते सभी लोगों से समानता का व्यवहार करता। (2) सरपंच होने के नाते अपने क्षेत्र या गाँव में विद्यालय और राजकीय अस्पताल खुलवाता। (3) असहाय, निर्धन लोगों को आर्थिक सहायता दिलवाता। कुटीर उद्योग को बढ़ावा देकर बेरोजगारों को रोजगार दिलवाता। (4) सरकार द्वारा चलायी जा रही सभी जनोपयोगी योजनाओं का ईमानदारी के साथ संचालन करवाता।
उपसंहार - इस प्रकार यदि मैं सरपंच होता तो जनहित में अनेक ऐसे कार्यक्रम बनाता जिससे गाँव या क्षेत्र विशेष का चहुंमुखी विकास होता।