समय की शक्ति से कौन अपरिचित है? बड़े-बड़े विजेताओं की भी समय के सामने एक नहीं चल पाई। अच्छे-अच्छों को चित करने वाले पहलवान समय के सामने चित हो गए। बहुतों को शुभ मुहूर्त बताने वाले ज्योतिषाचार्य अपना अशुभ मुहूर्त न टाल सके। सचमुच समय के बल को कोई नहीं जान सकता। इसीलिए कबीर ने 'पल में परलय होएगी' कहकर लोगों को आवश्यक कार्य समय रहते कर लेने की सुनहरी सलाह दी है।
दूसरों का बल दिखाई देता है। राजाओं का सैन्य बल आँका जा सकता है। आजकल तो मिसाइल और बम, सेना से अधिक बलवान हो गए हैं। परंतु इनकी शक्ति को किसी-न-किसी तरह मालूम किया जा सकता है। समय की शक्ति तो इनसे भी परे है।
यदि समय से लड़ने की शक्ति होती, तो सिकंदर का विश्व विजय करने का सपना अधूरा नहीं रह जाता। यदि वीर नेपोलियन बोनापार्ट समय से लड़ पाता, तो सेंट हेलेना टापू के कारावास में नहीं मरता। यदि समय को जीतने की शक्ति होती, तो हिटलर को पराजित होकर एकांत में मृत्यु स्वीकार न करनी पड़ती।
अपने-अपने क्षेत्र में वे ही विजयी हुए हैं, जिनका समय ने साथ दिया है। कहावत है कि 'वक्त मेहरबान तो गधा पहलवान।' सचमुच समय का साथ पाकर जर्रा भी सितारा बन जाता है। परिवार को जिनसे कोई आशा नहीं थी, ऐसे कपूत समय का बल पाकर 'सपूत' बन गए। गुमनामी के अंधकार में जीने वाले प्रसिद्धि के शिखर पर पहुँच गए।
वास्तव में समय ही भाग्य और समय ही दुर्भाग्य है। समय ही उत्थान है और समय ही पतन है। समय झोंपड़ी को राजमहल और राजमहल को झोंपड़ी में बदल देता है।
बलवान समय ने सबको जीता है। सबने उसके सामने घुटने टेके हैं। समय का दुरुपयोग ही उसका विरोध करना है और समय का सदुपयोग ही उसकी महत्ता को स्वीकार करना है।