प्रस्तावना - मानव विचारशील प्राणी है। उसके विचार कभी अपने तक सीमित हैं तो कभी समाज व राष्ट्र तक फैल जाते हैं। इस दृष्टि से मैं यह सोच करता हूँ कि यदि मेरे सपनों का भारत बन जाए तो कितना ही अच्छा रहे।
मेरे सपनों का भारत - मेरे सपनों के भारत में चारों ओर मित्रता, भाईचारा, स्नेह एवं सदाचार का बोलबाला होगा। भारत में धन का समान वितरण हो, कहीं किसी का शोषण न हो। भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी का अन्त हो। कठोर दण्ड विधान हो। सभी जगह खुशहाली हो। अन्याय, अत्याचार का अन्त हो। हमारा देश सभी क्षेत्रों में सुशासन के साथ उन्नति करे। युवाओं की बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई समाप्त हो। भारत सभी क्षेत्रों में प्रगति कर विश्व में अपना गौरव बढ़ाये।"
उपसंहार - मैं अपने भारत को सभी दृष्टियों से महान देखना चाहता हूँ। इसलिए हम सब मिलकर परिश्रम करें, तो वह सुदिन अवश्य आ सकता है।