समुद्र-तट पर विशाल जामुन वृक्ष पर एक वानर रहता था। एक दिन समुद्र से निकलकर कोई मगर उस पेड़ के नीचे रेत पर लेट गया, वानर ने उसे जामुन के फल दिये। इस तरह उन दोनों में मित्रता हो गई। एक दिन मगर वानर के पास गया और बोला कि मेरी पत्नी तुमसे मिलना चाहती है। तुम मेरी पीठ पर बैठकर समुद्र के बीच में उससे मिलने चलो। वानर उसकी बातों में आ गया तथा उसकी पीठ पर बैठ गया। बीच समुद्र में जाने पर मगर ने कहा कि मेरी पत्नी तुम्हारा हृदय खाना चाहती है, इसीलिए मैंने तुम्हारे साथ छल किया है। वानर ने चतुराई से कहा कि मेरा हृदय पेड़ पर रखा रहता है। तुमने पहले नहीं बताया। वापस चलो, मैं पेड़ से अपना हृदय ले आता हूँ। मूर्ख मगर वानर की बात मान गया। वह उसे वापिस ले आया। तब वानर शीघ्रता से उसकी पीठ से उतरकर पेड़ पर चढ़ गया और बोला कि अरे मूर्ख, विश्वासघाती! दूर हट जा, फिर कभी इस पेड़ के नीचे मत आना।