प्रस्तावना - जीवन कई घटनाएँ तो ऐसी होती रहती हैं जो कभी भुलाई नहीं जा सकती। एक आँखों देखी घटना का वर्णन कर रहा हूँ जिसको मैं कभी भुला नहीं पाऊँगा। यात्रा का उद्देश्य एवं कार्यक्रम-दीपावली की छुट्टियों में मैं अपने मामा के घर अजमेर गया। एक दिन हम सभी ने पुष्कर नहाने की योजना बनाई।
मनोरम प्रसंग - पुष्कर पहुँचकर देखा कि वहाँ अपार भीड़ थी। सरोवर घाट पर बच्चे, आदमी, औरतें सभी स्नान कर रहे थे। उसी समय मैंने देखा कि एक महिला लगभग आठ वर्ष के अपने बालक को नहलाने लगी। बालक अपनी चंचलता के कारण अपनी माता के हाथों से छूट गया और पानी के अन्दर डूबने लगा। यह देखकर उसकी माँ रोने और चिल्लाने लगी। घटित घटना और अविस्मरणीय दृश्य-भीड़ एकत्र हो गयी।
सभी डूबते बालक पर नजर लगाये हुए थे। काफी समय बाद एक मगर बालक को मुँह में दबाये हुए ऊपर आया फिर पानी में चला गया। मैं इस दृश्य को देखकर गमगीन हो गया और दु:खी मन से अपने साथियों के साथ वापस आ गया। उपसंहार-मैंने जीवन में अनेक घटनाएँ देखीं, परन्तु ऐसी करुण घटना जीवन में अभी तक एक ही बार देखी।