प्रस्तावना - स्वच्छता का अर्थ साफ-सफाई से है। साफसफाई से रहना मनुष्य के लिए अति आवश्यक है, क्योंकि इसके पीछे हमारी 'नीरोगी काया' बनाए रखने की अवधारणा रहती है।
स्वच्छता की आवश्यकता - स्वच्छता सिर्फ हमारे शरीर के बारे में नहीं होनी चाहिए। इसे हमारे परिवेश को अच्छा बनाए रखने पर भी ध्यान देना चाहिए। भारत में कठोर मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए हमें स्वच्छ रहना चाहिए और अपने प्रियजनों को स्वच्छता की आवश्यकता की भी शिक्षा देनी चाहिए, क्योंकि स्वच्छता भक्ति के समान है। अपने मन, तन, और आत्मा को स्वच्छ और शान्तिपूर्ण रखने के लिए जीवन के हर क्षेत्र में इसकी आवश्यकता है।
स्वच्छता का महत्त्व - स्वस्थ शरीर, मन और जीवन में अन्तिम सफलता प्राप्त करने हेतु हम सभी के लिए स्वच्छ होना अनिवार्य है, क्योंकि यह केवल स्वच्छता ही है जो बाहरी और आन्तरिक रूप से स्वच्छ रहकर हमारे व्यक्तित्व को बेहतर बनाने में मदद करती है। एक स्वच्छ शरीर हमें स्वस्थ रखता है और डॉक्टरों से दूर रखता है। स्वच्छता से मन में अच्छे और सकारात्मक विचार आते हैं।
उपसंहार - स्वच्छता ही जीवन है। स्वच्छ रहना हमारा अनिवार्य कर्म और धर्म है। उसके प्रति सहयोगात्मक दृष्टि से पूर्ण भागीदारी निभानी चाहिए।