किसी जंगल में तालाब के किनारे एक खरगोश और एक कछुआ रहते थे। दोनों में अच्छी मित्रता थी। खरगोश को अपनी तेज चाल का घमण्ड था, इसलिए वह कछुआ की धीमी चाल का मजाक उड़ाता था। एक दिन कछुए ने खरगोश से कहा कि तुम मेरा मजाक उड़ाते हो, क्यों न हम दोनों में दौड़ हो जाए? खरगोश दौड़ने के लिए राजी हो गया। दौड़ प्रारम्भ हुई तो खरगोश दौड़कर बहुत आगे निकल गया। उसने देखा कि कछुआ अभी बहुत पीछे रह गया है, तो क्यों 'न विश्राम कर लिया जाए।
तब वह एक पेड़ के नीचे सुस्ताने लगा और सो गया। कछुआ अपनी धीमी चाल से चलता हुआ खरगोश से आगे पहुँच गया। जब खरगोश सोकर उठा तो तेजी से दौड़ा उसने देखा कि कछुआ तय स्थान पर पहले ही पहुंच गया था। इससे खरगोश ने अपनी हार मान ली। शिक्षा-घमण्ड नहीं करना चाहिए, किसी का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए।