प्रस्तावना - मनुष्य को ज्ञान देकर सामाजिक बनाने, उसे सभ्य नागरिक बनाने की प्रक्रिया का नाम ही शिक्षा है। शिक्षा से ही भविष्य में स्वावलम्बी बनने की योग्यता एवं क्षमता बढ़ती है।
शिक्षा का अधिकार-स्वतन्त्रता - प्राप्ति के समय ही हमारे संविधान में यह निश्चय किया गया कि आगामी दस वर्षों में चौदह वर्ष तक के सभी बालकों को बुनियादी शिक्षा अनिवार्य रूप से दी जायेगी।
शिक्षा के अधिकार का स्वरूप - प्रत्येक बालक को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार होगा। किसी विद्यालय में प्रविष्ट बालक को कक्षा 8 तक किसी कक्षा में नहीं रोका जायेगा और प्रारम्भिक शिक्षा पूरी किये बिना विद्यालय से निकाला भी नहीं जायेगा। बालक को शारीरिक दण्ड या मानसिक उत्पीड़न नहीं मिलेगा।
शिक्षा का अधिकार से लाभ -
- प्रत्येक बालक को प्रारम्भिक शिक्षा निःशुल्क मिलेगी।
- समाज में साक्षरता का प्रतिशत बढ़ेगा।
- शिक्षा परीक्षोन्मुखी न होकर बुनियादी हो जायेगी।
- शिक्षा का व्यवसायीकरण रुक जायेगा।
- गरीब अभिभावकों को उसका पूरा लाभ मिलेगा।
उपसंहार - शिक्षा से समाज का विकास तथा ज्ञान का उचित प्रसार होने लगा है तथा साक्षरता का प्रतिशत बढ़ रहा है।