Question 12 Marks
सामान्य विचार है कि केवल नाभिकीय क्रिया में ही द्रव्यमान-ऊर्जा एक दूसरे में बदले जा सकते हैं जबकि रासायनिक क्रिया में यह कभी नहीं होता है। यह कहना असत्य है। समझाइए।
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यदि प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्या, प्रत्येक नाभिकीय अभिक्रिया में संरक्षित रहती है, किसी नाभिकीय अभिक्रिया में किस प्रकार द्रव्यमान, ऊर्जा में (या इसका उलटा) बदलता है?
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क्या नाभिकीय अभिक्रियाओं के समीकरण $\triangle M = [Zm_p+ (A-Z)m_n\ l - M$ रासायनिक समीकरण $($उदाहरण के लिए $2 \mathrm{H}_{2}+\mathrm{O}_{2} \rightarrow 2 \mathrm{H}_{2} \mathrm{O})$ के रूप में संतुलित हैं$?$ यदि नहीं तो किस रूप में दोनों ओर समीकरण संतुलित होंगे।
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हमें निम्नलिखित परमाणु द्रव्यमान दिए गए हैं:
${ }_{234}^{238} \mathrm{U}=238.05079 \mathrm{u} $ ${ }_{2}^{4} \mathrm{He}=4.00260 \mathrm{u}$ ${ }_{90}^{234} \mathrm{Th}=234.04363 \mathrm{u} $ ${ }_{1}^{1} \mathrm{H}=1.00783 \mathrm{u}$ ${ }_{91}^{237} \mathrm{~Pa}=237.05121 \mathrm{u}$
यहाँ प्रतीक $\mathrm{Pa}$ तत्व प्रोटऐक्टिनियम (Z = 91) तत्व के लिए है।
- $ { }_{92}^{238} \mathrm{U} $के $\alpha$-क्षय में उत्सर्जित ऊर्जा परिकलित कीजिए।
- दर्शाइए कि $ { }_{92}^{238} \mathrm{U}$ स्वतः प्रोटॉन उत्सर्जन नहीं कर सकता।
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$\beta$-क्षय द्वारा, ट्राइटियम की अर्ध-आयु 12.5 वर्ष है। 25 वर्ष बाद शुद्ध ट्राइटियम के एक नमूने का कितना अंश अविघटित रहेगा?
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क्षयित हो रहे ${ }_{92}^{238} \mathrm{U}$की, $\alpha$-क्षय के लिए अर्ध-आयु 4.5 $\times 10^{9}$ वर्ष है।$ { }_{92}^{238} \mathrm{U}$ के $1 \mathrm{~g}$ नमूने की ऐक्टिवता क्या है?
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एक परमाणु द्रव्यमान मात्रक के समतुल्य ऊर्जा का मान पहले जूल और फिर MeV में ज्ञात कीजिए। इसका उपयोग करके $ { }_{8}^{16} \mathrm{O}$ की द्रव्यमान क्षति $\mathrm{MeV} / \mathrm{c}^{2}$ में व्यक्त कीजिए।
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1 g पदार्थ के समतुल्य ऊर्जा को परिकलित कीजिए।
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लोहे के नाभिक का द्रव्यमान 55.85u एवं A = 56 है, इसका नाभिकीय घनत्व ज्ञात कीजिए।
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8.0 mCi सक्रियता का रेडियोएक्टिव स्रोत प्राप्त करने के लिए ${ }_{27}^{60} \mathrm{Co}$ की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी? $ { }_{27}^{60} \mathrm{Co}$ की अर्धायु 5.3 वर्ष है।
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जीवित कार्बनयुक्त द्रव्य की सामान्य ऐक्टिवता, प्रति ग्राम कार्बन के लिए 15 क्षय प्रति मिनट है। यह ऐक्टिवता, स्थायी समरथानिक ${ }_{6}^{14} \mathrm{C}$ के साथ-साथ अल्प मात्रा में विद्यमान रेडियोऐक्टिव ${ }_{6}^{12} \mathrm{C}$के कारण होती है। जीव की मृत्यु होने पर वायुमण्डल के साथ इसकी अन्योन्य क्रिया (जो उपर्युक्त संतुलित ऐक्टिवता को बनाए रखती है) समाप्त हो जाती है, तथा इसकी ऐक्टिवता कम होनी शुरू हो जाती है। ${ }^{14}{ }^{14} \mathrm{C}$ की ज्ञात अर्धायु (5730 वर्ष) और नमूने की मापी गई ऐक्टिवता के आधार पर इसकी सन्निकट आयु की गणना की जा सकती है। यही पुरातत्व विज्ञान में प्रयुक्त होने वाली ${ }_{6}^{14} \mathrm{C}$ कालनिर्धारण (dating) पद्धति का सिद्धान्त है। यह मानकर कि मोहनजोदड़ों से प्राप्त किसी नमूने की ऐक्टिवता 9 क्षय प्रति मिनट प्रति ग्राम कार्बन है। सिंधु घाटी सभ्यता के सन्निकट आयु का मिनट प्रति ग्राम आकलन कीजिए।
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एक रेडियोएक्टिव समस्थानिक की अर्धायु T वर्ष है। कितने समय के बाद इसकी ऐक्टिवता, प्रारम्भिक ऐक्टिवता की
- 3.125% तथा
- 1% रह जाएगी।
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निम्नलिखित के लिए नाभिकीय समीकरण लिखिए-
- ${ }_{88}^{226}$ Ra का $\alpha$- क्षय
- ${ }_{94}^{242}$ Pu का $\alpha$ - क्षय
- ${ }_{15}^{32}$ P का $\beta^{-}$- क्षय
- $ { }_{83}^{210}$ Bi का $\beta^{-}$- क्षय
- ${ }_{6}^{11}$C का $\beta^{+}$- क्षय
- ${ }_{43}^{97}$Tc का $\beta^{+}$- क्षय
- $ { }_{54}^{120}$ Xe का इलेक्ट्रॉन अभिग्रहण
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एक दिए गए सिक्के का द्रव्यमान 3.0 g है। उस ऊर्जा की गणना कीजिए जो इस सिक्के के सभी न्यूटॉनों एवं प्रोटॉनों को एक-दूसरे से अलग करने के लिए आवश्यक हो। सरलता के लिए मान लीजिए कि सिक्का पूर्णत :
${ }_{29}^{63} \mathrm{Cu}$ परमाणुओं का बना है $\left({ }_{29}^{63} \mathrm{Cu}\right.$ का द्रव्यमान = 62.92960 u)
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निम्नलिखित आकड़ों के आधार पर $_{26}^{56} \mathrm{Fe}$ एवं $ { }_{83}^{209} \mathrm{Bi}$ नाभिकों की बन्धन $-$ ऊर्जा $\ce{MeV}$ में ज्ञात कीजिए।
$m\left( { }_{26}^{56} \mathrm{Fe}\right)= 55.934939 u$
$m\left({ }_{83}^{209} \mathrm{Bi}\right) = 208.980388 u$
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मान लीजिए कि भारत का लक्ष्य 2020 तक 200,000 MW विद्युत शक्ति जनन का है। इसका 10% नाभिकीय शक्ति संयंत्रों से प्राप्त होना है। माना कि रिएक्टर की औसत उपयोग दक्षता (ऊष्मा को विद्युत में परिवर्तित करने की क्षमता) 25% है। 2020 के अंत तक हमारे देश को प्रति वर्ष कितने विखंडनीय यूरेनियम की आवश्यकता होगी। ${ }^{235}U$ प्रति विखंडन उत्सर्जित ऊर्जा 200 MeV है।
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सूर्य के अभ्यंतर में
- 1 किग्रा. हाइड्रोजन के संलयन के समय विमुक्त ऊर्जा का परिकलन कीजिए।
- विखंडन रिएक्टर में$ 1.0 \mathrm{~kg}{ }^{235} \mathrm{U}$ के विखंडन में विमुक्त ऊर्जा का परिकलन कीजिए। (c) तथा (b) प्रश्नों में विमुक्त ऊर्जाओं की तुलना कीजिए।
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नाइट्रोजन नाभिक $\left({ }_{7}^{14} \mathrm{~N}\right)$ की बंधन-ऊर्जा MeV में ज्ञात कीजिए$ m_{N}$ = $14.00307u$.
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D-T अभिक्रिया (ड्यूटीरियम-ट्रीटियम संलयन), $ { }_{1}^{2} \mathrm{H}+{ }_{1}^{3} \mathrm{H} \rightarrow{ }_{2}^{4} \mathrm{He}$ + n पर विचार कीजिए।
- नीचे दिए गए आँकड़ों के आधार पर अभिक्रिया में विमुक्त ऊर्जा का मान MeV में ज्ञात कीजिए: $m\left({ }_{1}^{2} \mathrm{H}\right)$ = 2.014102 u,$m\left({ }_{1}^{3} \mathrm{H}\right)$ = 3.016049 u
- ड्यूटीरियम एवं ट्राइटियम दोनों की त्रिज्या लगभग 1.5 fm मान लीजिए। इस अभिक्रिया में, दोनों नाभिकों के मध्य कूलॉम प्रतिकर्षण से पार पाने के लिए कितनी गतिज ऊर्जा की आवश्यकता है? अभिक्रिया प्रारंभ करने के लिए गैसों (D तथा T गैसें) के किस ताप तक ऊष्मित किया जाना चाहिए?
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तीव्र न्यूट्रॉनों द्वारा ${ }_{92}^{238} \mathrm{U}$ के विखंडन पर विचार कीजिए किसी विखंडन प्रक्रिया में प्राथमिक अंशों (Primary fragments) के बीटा-क्षय के पश्चात् कोई न्यूट्रॉन उत्सर्जित नहीं होता तथा ${ }_{58}^{140} \mathrm{Ce}$ तथा ${ }_{44}^{99} \mathrm{Ru}$अंतिम उत्पाद प्राप्त होते हैं। विखंडन प्रक्रिया के लिए Q के मान का परिकलन कीजिए। आवश्यक आँकड़े इस प्रकार हैं:
$m\left({ }_{92}^{238} \mathrm{U}\right)$ = 238.05079 u, $ m\left({ }_{58}^{140} \mathrm{Ce}\right)$ = 139.90543 u, $m\left({ }_{44}^{99} \mathrm{Ru}\right)$ = 98.90594 u
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कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में, एक नाभिक$ \alpha$-कण से अधिक द्रव्यमान वाला एक कण उत्सर्जित करके क्षयित होता है। निम्नलिखित क्षय-प्रक्रियाओं पर विचार कीजिए:
${ }_{88}^{223} \mathrm{Ra} $$\rightarrow$${82}^{209} \mathrm{~Pb}+{ }_{6}^{14} \mathrm{C}$ $ { }_{88}^{223} \mathrm{Ra} $$\rightarrow{ }$$_{86}^{219} \mathrm{Rn}$ + ${ }_{2}^{4} \mathrm{He}$
इन दोनों क्षय प्रक्रियाओं के लिए Q-मान की गणना कीजिए और दर्शाइए कि दोनों प्रक्रियाएँ ऊर्जा की दृष्टि से संभव हैं।
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किसी स्रोत में फॉस्फोरस के दो रेडियो न्यूक्लाइड निहित हैं ${ }_{15}^{32} \ P (T_{1/2 }= 14.3 d)$ एवं ${ }_{15}^{33}$
$P(T_{1/2}) = 25.3 d)।$ प्रारंभ में $ { }_{15}^{33}\ P$ से $10\%$ क्षय प्राप्त होता है। इससे $90$ क्षय प्राप्त करने के लिए कितने समय प्रतीक्षा करनी होगी?
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न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जा (Separation energy), परिभाषा के अनुसार, वह ऊर्जा है जो किसी नाभिक से एक न्यूट्रॉन को निकालने के लिए आवश्यक होती है। नीचे दिए गए आँकड़ों का इस्तेमाल करके ${ }_{20}^{41} \mathrm{Ca}$ एवं ${ }_{13}^{27} \mathrm{Al}$ नाभिकों की न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
$m\left({ }_{20}^{40} \mathrm{Ca}\right)$ = 39.962591 u m$\left({ }_{20}^{41} \mathrm{Ca}\right)$= 40.962278 u
$m\left({ }_{13}^{26} \mathrm{Al}\right)$ = 25.986895 u $m\left({ }_{13}^{27} \mathrm{Al}\right)$= 26.981541 u
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किसी नाभिक से $\beta^{+}$(पॉजिट्रॉन) उत्सर्जन की एक अन्य प्रतियोगी प्रक्रिया है जिसे इलेक्ट्रॉन परिग्रहण (Capture) कहते हैं (इसमें परमाणु की आंतरिक कक्षा, जैसे कि K-कक्षा, से नाभिक एक इलेक्ट्रॉन परिगृहीत कर लेता है और एक न्यूट्रिनों, $\nu$ उत्सर्जित करता है $e^{+}+{ }_{Z}^{A} X$$\rightarrow{ }$$_{Z-1}^{A} Y+\nu$ दर्शाइए कि यदि $\beta^{+}$ उत्सर्जन ऊर्जा विचार से अनुमत है तो इलेक्ट्रॉन परिग्रहण भी आवश्यक रूप से अनुमत है, परंतु इसका विलोम अनुमत नहीं है।
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समीकरण $R = R_0A^\frac{1}{2}$ के आधार पर, दर्शाइए कि नाभिकीय द्रव्य का घनत्व लगभग अचर है $($अर्थात् $A$ पर निर्भर करता है$)$ यहाँ $R_0$ एक नियतांक है एवं $A$ नाभिक की द्रव्यमान संख्या है।
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दो ड्यूट्रॉनों के आमने-सामने की टक्कर के लिए कूलॉम अवरोध की ऊँचाई ज्ञात कीजिए। (संकेत-कूलॉम अवरोध की ऊँचाई का मान इन ड्यूट्रॉन के बीच लगने वाले उस कूलॉम प्रतिकर्षण बल के बराबर होता है जो एक-दूसरे को संपर्क में रखे जाने पर उनके बीच आरोपित होता है। यह मान सकते हैं कि ड्यूट्रॉन 2.0 fm प्रभावी त्रिज्या वाले दृढ़ गोले हैं।)
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नियॉन के तीन स्थायी समस्थानिकों की बहुलता क्रमश : 90.51%, 0.27% एवं 9.22% है। इन समस्थानिकों के परमाणु द्रव्यमान क्रमश : 19.99 u, 20.99 u एवं 21.99 u हैं। नियॉन का औसत परमाणु द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
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2.0 kg ड्यूटीरियम के संलयन से एक 100 वाट का विद्युत लैंप कितनी देर प्रकाशित रखा जा सकता है? संलयन अभिक्रिया निम्नवत ली जा सकती है ${ }_{1}^{2} \mathrm{H}+{ }_{1}^{2} \mathrm{H} \rightarrow{ }_{2}^{3} \mathrm{He}$ + n + 3.27 MeV.
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किसी 1000 MW विखंडन रिएक्टर के आधे ईधन का 5.00 वर्ष में व्यय हो जाता है। प्रारंभ में इसमें कितना ${ }_{92}^{235}$ U था? मान लीजिए कि रिएक्टर 80% समय कार्यरत रहता है; इसकी सम्पूर्ण ऊर्जा $ { }_{92}^{235}$ U के विखंडन से ही उत्पन्न हुई है; तथा $ { }_{92}^{235} $U न्यूक्लाइड केवल विखंडन प्रक्रिया में ही व्यय होता है।
View full question & answer→Question 302 Marks
${ }_{94}^{239} $Pu के विखंडन गुण बहुत कुछ ${ }_{92}^{235} $U से मिलते-जुलते हैं। प्रति विखंडन विमुक्त औसत ऊर्जा 180 MeV है। यदि 1 kg शुद्ध ${ }_{94}^{239}$ Pu के सभी परमाणु विखंडित हों तो कितनी MeV ऊर्जा विमुक्त होगी?
View full question & answer→Question 312 Marks
किसी नाभिकीय अभिक्रिया $A + b \rightarrow C + d$ का $Q-$मान निम्नलिखित समीकरण द्वारा परिभाषित होता है,
$Q = [m_A + m_b - m_c - m_d]c^2$
जहाँ दिए गए द्रव्यमान, नाभिकीय विराम द्रव्यमान $($rest mass$)$ है। दिए गए आँकड़ों के आधार पर बताइए कि निम्नलिखित अभिक्रियाएँ ऊष्माक्षेपी हैं या ऊष्माशोषी।
- ${ }_{1}^{1} \mathrm{H}+{ }_{1}^{3} \mathrm{H} \rightarrow{ }_{1}^{2} \mathrm{H}+{ }_{1}^{2} \mathrm{H}$
- ${ }_{6}^{12} \mathrm{C}+{ }_{6}^{12} \mathrm{C} \rightarrow{ }_{10}^{20} \mathrm{Ne}+{ }_{2}^{4} \mathrm{He}$
दिये गए परमाणु द्रव्यमान इस प्रकार हैं:
$m\ \left({ }_{1}^{2} \mathrm{H}\right) = 2.014102\ u$
$m\ \left({ }_{1}^{3} \mathrm{H}\right) = 3.016049\ u$
$m\ \left({ }_{6}^{12} \mathrm{C}\right) = 12.000000\ u$
$m\ \left({ }_{10}^{20} \mathrm{Ne}\right) = 19.992439\ u$ View full question & answer→Question 322 Marks
${ }_{10}^{23} \mathrm{Ne}$ का नाभिक, $\beta$-उत्सर्जन के साथ क्षयित होता है। इस $\beta$-क्षय के लिए समीकरण लिखिए और उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए। m$\left({ }_{10}^{23} \mathrm{Ne}\right)$ = 22.994466 u; m$\left({ }_{11}^{23} \mathrm{Na}\right)$ = 22.089770 u.
View full question & answer→Question 332 Marks
रेडियोन्यूक्लाइड ${ }_{6}^{11}\ C $ का क्षय निम्नलिखित समीकरण के अनुसार होता है, ${ }_{6}^{11} C \rightarrow{ }_{5}^{11} B + e^{+} \nu ; T_{1/2 } = 20.3\ min$ उत्सर्जित पॉजिट्रॉन की अधिकतम ऊर्जा $0.960\ MeV$ है। द्रव्यमानों के निम्नलिखित मान दिए गए हैं $\ m \left({ }_{6}^{11} \mathrm{C}\right) = 11.011434\ u$ तथा $m\left({ }_{5}^{11}\mathrm{~B}\right) = 11.000305\ u. Q-$ मान की गणना कीजिए एवं उत्सर्जित पॉजिट्रॉन की अधिकतम ऊर्जा के मान से इसकी तुलना कीजिए।
View full question & answer→Question 342 Marks
- ${ }_{88}^{226}$ Ra एवं
- ${ }_{86}^{220}$ Rn
नाभिकों के $\alpha$-क्षय में उत्सर्जित $\alpha$-कणों का Q-मान एवं गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
दिया है- m$\left({ }_{88}^{226} \mathrm{Ra}\right)$ = 226.02540 u,m = $\left({ }_{86}^{226} \mathrm{Rn}\right)$222.01750 u, m$\left({ }_{86}^{222} \mathrm{Rn}\right)$ = 222.01137 u, m$\left({ }_{84}^{216} \mathrm{Po}\right)$ = 216.00189 u.
View full question & answer→Question 352 Marks
${ }_{38}^{90} \mathrm{Sr}$ की अर्धायु 28 वर्ष है। इस समस्थानिक के 15 mg की विघटन दर क्या है?
View full question & answer→Question 362 Marks
- लीथियम के दो स्थायी समस्थानिकों ${ }_{3}^{6} \mathrm{Li}$ एवं $ { }_{3}^{7} \mathrm{Li}$ की बहुलता का प्रतिशत क्रमशः 7.5 एवं 92.5 हैं। इन समस्थानिकों के द्रव्यमान क्रमश : 6.01512 u एवं 7.01600 u हैं। लीथियम का परमाणु द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
- बोरॉन के दो स्थायी समस्थानिक ${ }_{5}^{10} \mathrm{~B}$ एवं ${ }_{5}^{11} \mathrm{~B}$है। उनके द्रव्यमान क्रमशः $10 \cdot 01294 u $ एवं $11 \cdot 00931 u$एवं बोरॉन का परमाणु भार $10.811 u$ है। ${ }_{5}^{10} \mathrm{~B}$ एवं$ { }_{5}^{11} \mathrm{~B}$ की बहुलता ज्ञात कीजिए।
View full question & answer→Question 372 Marks
परिभाषित कीजिए-
(i). रेडियो एक्टिवता$\quad$$\quad$(ii). द्रव्यमान क्षति
Answer(i) अस्थिर नाभिकों से स्थिरता प्राप्त करने के लिए स्वतः विकिरणों का उत्सर्जन।
(ii) न्यूक्लियॉनों के कुल द्रव्यमान और नाभिक के वास्तविक द्रव्यमान का अंतर।
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